चित्रकूट : कामदगिरि पर्वत के बंदरों की भूख मिटाने को आगे आए समाजसेवी

चित्रकूट : कामदगिरि पर्वत के बंदरों की भूख मिटाने को आगे आए समाजसेवी
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- भाजपा नेता रामबाबू गुप्ता ने लिया 31 दिनों तक नियमित बंदरों का भंडारा कराने का संकल्प चित्रकूट, 29 अप्रैल (हि.स.)। आदि तीर्थ चित्रकूट में कोरोना महामारी के प्रकोप का खासा असर नजर आ रहा है। मध्य प्रदेश सरकार ने जहां सात मई तक सम्पूर्ण लॉक डाउन लगाने की घोषणा की है। वहीं यूपी सरकार ने भी नाईट कर्फ्यू के साथ-साथ साप्ताहिक बंदी को दो दिन से बढ़ाकर तीन दिन कर दिया है। कोरोना का ग्रहण लगने से धर्म नगरी चित्रकूट में सन्नाटा पसरा हुआ है। जिसके चलते कामदगिरि पर्वत के बंदर और अन्य जीव जंतु भूख से तड़प रहे है। ऐसे में भाजपा के जिला मंत्री एवं समाजसेवी रामबाबू गुप्ता ने 31 दिनों तक नित्य बंदर सेवा का व्रत लिया है। आपको बता दे, भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट विश्व के प्रमुख पौराणिक तीर्थो में से एक है। धर्म नगरी के कामदगिरि पर्वत पर ही प्रभु श्रीराम ने सीता और अनुज लक्ष्मण के साथ वनवास काल का सर्वाधिक साढ़े 11 वर्षों का समय ऋषि-मुनियों के सानिध्य में व्यतीत किया था। प्रभु श्रीराम के वरदान से ही कामदगिरि पर्वत को मनोकामनाओं के पूरक होने का वरदान प्राप्त हुआ था। तभी से देश भर से करोड़ों श्रद्धालु प्रतिवर्ष अपनी मनौतियों को पूरा करने के लिए भगवान श्रीकामतानाथ के दर्शन एवं कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा करने के लिए चित्रकूट आते रहे है। इधर, दो वर्षों से कोरोना महामारी का प्रकोप बढ़ने से तीर्थ यात्रियों एवं बाहरी पर्यटकों का आवागमन ठप होने से चित्रकूट में वीरानी छा गई है। जिसका बड़ा असर कामदगिरि पर्वत पर बसेरा बनाने वाले हजारों बेजुबान बंदरों के जीवन पर पड़ रहा है। यूपी-एमपी शासन-प्रशासन की अनदेखी से भूख और प्यास से तड़प-तड़प कर बेजुबानों की मौत हो रहीं है। संतों ने कामदगिरि पर्वत को वन्य जीव अभ्यारण बनाकर बंदरों का संरक्षण किये जाने की मांग की है। वहीं बेजुबानों की भुखमरी की समस्या मीडिया में हाईलाइट होने पर चित्रकूट समेत आस-पास के लोग मदद ने लिए आगे आने लगे है। इसी क्रम में वरिष्ठ भाजपा नेता एवं समाजसेवी रामबाबू गुप्ता ने कामदगिरि परिक्रमा के आकर्षण का केंद्र हजारों बेजुबान बंदरों को भुखमरी से बचाने के संकल्प लिया है। समाजसेवी श्री गुप्ता ने बताया कि 31 दिनों तक लगातार उन्होंने बंदर सेवा का व्रत लिया है। इस दौरान उनके द्वारा नित्य कामदगिरि परिक्रमा में केला, चना, खीरा, पूड़ी, टमाटर आदि सामग्री का बंदरों का भंडारा कराया जायेगा। उन्होंने बताया कि गुरुवार से बंदर सेवा का शुभारम्भ कर दिया गया है। यह सेवा निरंतर 31 दिनों तक चलेगी। उन्होंने कहा कि बंदरों की भगवान श्रीराम की सेना के रूप में पूजन किया जाता रहा है। इसके अलावा उन्होंने जिले के सभी समाजसेवियों और व्यापारियों से बेजुबान बंदरों और गौवंशों के जीवन रक्षा के लिए आगे आने की अपील की है। हिन्दुस्थान समाचार / रतन