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उत्तर-प्रदेश

कोरोना से संसार को बचाने के लिए आगे आयें बच्चे- डॉ. विद्या विन्दु सिंह

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- दादी-नानी की कहानी कार्यक्रम में बच्चों से मांगी गयी मदद लखनऊ, 29 अप्रैल (हि.स.)। कोरोना संक्रमण से बचने और अपने परिवार को बचाने की जिम्मेदारी बच्चों की भी है। इसके लिए जरूरी है कि हम खुद का और अपने परिवार का ख्याल रखें। सभी लोग अपना हाथ धोते रहें, घर में ही रहें और यदि बाहर जाना हो तो बिना मास्क लगाए ना निकलें। बच्चों की बात को बड़े लोग कभी नहीं टालते इसलिए सभी बच्चे मिलजुल कर वर्तमान संकट को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह बातें वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विद्या विन्दु सिंह ने लोक संस्कृति शोध संस्थान द्वारा आयोजित दादी नानी की कहानी श्रृंखला में कहानी सुनाने के दौरान कहीं। गुरुवार को फेसबुक लाइव के माध्यम से उन्होंने हनुमान व माता अन्नपूर्णा से संबंधित कथाएं बच्चों को सुनायीं। बाली-सुग्रीव और हनुमान की कथा सुनाते हुए उन्होंने यह संदेश दिया कि कभी भी अपने बल का घमंड नहीं करना चाहिए और यदि बल हो तो उसका दुरुपयोग कतई नहीं करना चाहिए। बाली को ब्रह्मा जी से यह वरदान प्राप्त था कि जो भी उससे लड़ने आएगा उसका आधा बल बाली को प्राप्त हो जाएगा। वरदान के कारण बाली को घमंड हो गया और वह तीनों लोको को अपने वश में कर लिया। महाबली रावण को भी परास्त कर अपनी पूंछ में लपेट लिया था। घमंड में चूर बाली जंगल के पेड़ पौधों को भी तहस-नहस करने लगा। जंगल में ध्यानावस्था में बैठे हनुमान जी ने जब पेड़ पौधों की पुकार सुनी तो आकर बाली को रोका, लेकिन घमंडी बाली ने हनुमान जी और उनके प्रभु श्री राम के बारे में भी भला बुरा कहते हुए युद्ध की चुनौती दे दी। दूसरे दिन युद्ध होना था तो ब्रह्मा जी ने हनुमान से अनुरोध किया कि वह अपना संपूर्ण बल लेकर बाली से युद्ध करने ना जायें। हनुमान जी अपने बल का दसवां अंश लेकर युद्ध करने गए, लेकिन बाली हनुमान जी के बल को सहन नहीं कर पाया और ब्रह्मा जी के कहने पर हनुमान जी से क्षमा मांगी। कथा के अंत में हनुमान जी से प्रार्थना की गई कि जिस प्रकार आप संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण का प्राण बचाए थे उसी प्रकार कोरोना महामारी से जूझ रही सृष्टि को भी बचाने आयें। दूसरी कहानी माता अन्नपूर्णा से संबंधित प्रसिद्ध लोक कथा रही जिसमें शंकर जी ने माता पार्वती को अन्नपूर्णा बनकर संसार का पेट भरने को कहा था। माता पार्वती ने शंकर जी से कहा कि इस काम में आपको मेरी मदद करनी पड़ेगी। जब आप समाधि में होते हैं तो आपके सभी गण खाली रहते हैं। आप कृपा कर अपने सभी गणों को मेरी सहायता के लिए कहें तथा अपना त्रिशूल हमें दे दें। मैं इस त्रिशूल से हल बनाऊंगी और नंदी को लेकर खेत जोतूंगी। आपके सिर पर विराजमान गंगा खेत को सींचेंगी, नाग बाबा खेतों को चूहों और अन्य नुकसान से बचाएंगे, भांग-धतूरा आदि से खेत के चारों ओर मेड़ बना दूंगी और आप के जो गण हैं उनसे मेहनत करवाऊंगी। इससे अन्न पैदा होगा और मैं अन्नपूर्णा बनकर संसार का पेट भर दूंगी। शंकर जी ने ऐसा ही किया और इस तरह मां पार्वती अन्नपूर्णा बनकर संसार की क्षुधा मिटाने लगीं। एक बार तो वह साग बन गई थीं इसलिए उन्हें शाकंभरी देवी भी कहा जाने लगा। लोक संस्कृति शोध संस्थान की सचिव सुधा द्विवेदी ने बताया कि दादी नानी की कहानी नामक मासिक श्रृंखला के अंतर्गत हम लोग विभिन्न विद्यालयों में जाकर बच्चों को बोधात्मक और प्रेरक कहानियां सुनाया करते थे किंतु कोरोना महामारी के दृष्टिगत पिछले सवा वर्ष से प्रतिमाह फेसबुक पर ही लाइव कहानी सुनाने का उपक्रम चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को हुए इस लाइव आयोजन से देश-विदेश के सैकड़ों लोग जुड़े और इसे देखा सुना तथा शेयर किया। हिन्दुस्थान समाचार/दीपक