चंद्रशेखर आजाद से अंग्रेजी हुकूमत थर-थर कांपती थी - पवन कुमार मिश्र
चंद्रशेखर आजाद से अंग्रेजी हुकूमत थर-थर कांपती थी - पवन कुमार मिश्र
उत्तर-प्रदेश

चंद्रशेखर आजाद से अंग्रेजी हुकूमत थर-थर कांपती थी - पवन कुमार मिश्र

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देवरिया, 23 जुलाई (हि.स.)। अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले और करोड़ों युवाओं के प्रेरणास्रोत रहे चंद्रशेखर आजाद की जयंती के अवसर पर आचार्य व्यास मिश्र स्मृति देवरिया महोत्सव समिति द्वारा पोस्टमार्टम चौराहे पर स्थित चन्द्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर जयंती कार्यक्रम का आयोजन किया गया। समिति अध्यक्ष पवन कुमार मिश्र ने सम्बोधित करते हुए कहा कि चंद्रशेखर आजाद ने अंग्रेजी हुकूमत थर-थर कांपती थी, उन्होंने कहा था कि "मैं आज़ाद था, आज़ाद हूं, आज़ाद रहूंगा" और वो सच में अपनी अंतिम सांसों तक आजाद रहें उनके राष्ट्रप्रेम ने देश के लाखों युवाओं के हृदय में स्वाधीनता की लौ जलाई। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए प्रधान संघ के जिलाअध्यक्ष राजेश मिश्रा ने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में हजारों-लाखों स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी जान न्योछावर किया, जिसमे चन्द्रशेखर आजाद जी ने भी भारत माँ को आजाद कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दिया, इनका बलिदान युगों युगों तक याद रखा जाएगा। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष अजय उपाध्याय ने कहा कि चन्द्रशेखर आजाद जी की जीवनी से आज भी देश के युवा प्रेरणा लेते हैं. मध्य प्रदेश में 23 जुलाई 1906 को चन्द्रशेखर आजाद का जन्म हुआ, करीब 14 साल की उम्र में वो आंदोलनों से जुड़ गए। उन्होंने कहा कि उन्ही वक्त उन्हें जेल भी जाना पड़ा और उसके बाद अंग्रेजों को हमेशा ही चंद्रशेखर आजाद खटकते रहे। आजाद ने ठानी थी कि कोई अंग्रेज उन्हें कभी जिंदा नहीं पकड़ पाएगा और ऐसा ही हुआ, अंतिम समय मे उन्होंने अल्फ्रेड पार्क (चन्द्रशेखर आजाद पार्क) प्रयागराज में अंग्रेजो से घिर जाने के बाद अपनी ही बंदूक की गोली से अपने प्राणों की आहुति दे दी। इस दौरान भाजपा पूर्व जिला मंत्री चंद्र प्रकाश सिंह, धनुषधारी मणि त्रिपाठी, अम्बिकेश पांडेय, रितेश कुमार शर्मा, राजू मिश्र उपस्थित रहें। हिन्दुस्थान समाचार/ज्योति/मोहित-hindusthansamachar.in