कोरोना से ठीक हुए मरीजों को गिरफ्त में ले रहा ब्लैक फंगस - डॉ वर्मा

कोरोना से ठीक हुए मरीजों को गिरफ्त में ले रहा ब्लैक फंगस - डॉ वर्मा
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लखनऊ, 22 मई (हि.स.)। केन्द्रीय होम्योपैथी परिषद के पूर्व सदस्य और वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ अनिरुद्ध वर्मा ने कहा कि ब्लैक फंगस एक गम्भीर रोग है। कोरोना वायरस से ठीक हुए मरीजों को ये रोग ज्यादा अपनी गिरफ्त में ले रहा है। शनिवार को डॉ वर्मा ने बताया कि कोरोना मरीजों में म्यूकर माइकोसिस अर्थात ब्लैक फंगस कुछ विशेष परिस्थितियों जैसे अनियंत्रित डायबिटीज, स्टेरॉयड की वजह से कमजोर इम्यूनिटी, लंबे समय तक आईसीयू या अस्पताल में भर्ती रहना, किसी अन्य गम्भीर बीमारी का होना, अंग प्रत्यारोपण के बाद या कैंसर मामले में होने की सम्भावना है। उन्होंने बताया कि शरीर पर किसी तरह की चोट, जलने या कटने आदि के जरिये भी यह त्वचा में प्रवेश कर विकसित हो सकता है। डॉ वर्मा ने बताया कि ब्लैक फंगस में मुख्य रूप से दिखने वाले लक्षण आंखों में लालपन या दर्द, बुखार, सिरदर्द, खांसी, सांस में तकलीफ, उल्टी में खून या मानसिक स्थिति में बदलाव से पहचान की जा सकती है। उन्होंने बताया कि ब्लैक फंगस से बचने के लिए धूल वाली जगहों पर मास्क पहनकर रहें। मिट्टी, काई या खाद जैसी चीजों के नजदीक जाते वक्त जूते, दस्ताने, पूरी बांह की शर्ट और ट्राउजर पहनें। साफ-सफाई का खास ध्यान रखें। डायबिटीज पर नियंत्रण, इम्यूनोमॉड्यूलेटरी दवाएं, स्टेरॉयड का कम से कम इस्तेमाल कर इससे बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त कोविड-19 से ठीक होने के बाद भी ब्लड शुगर का स्तर जांचते रहें। स्टेरॉयड का तर्क संगत और विवेकशील प्रयोग ही करें। ऑक्सीजन थैरेपी के दौरान आर्द्रता के लिए साफ पानी का ही इस्तेमाल करें। ऑक्सीजन ट्यूब का प्रयोग एक बार ही करें। उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक्स या एंटीफंगल दवाओं का इस्तेमाल विशेष जरूरत पड़ने पर चिकित्सक की सलाह पर ही करें। यह संक्रमण मरीज की आंख, नाक की हड्डी और जबड़े को भी बहुत नुकसान पहुंचा सकता है। समय रहते इसका उपचार होना बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे मृत्यु दर लगभग 50 से 60 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि ब्लैक फंगस के उपचार में होम्योपैथिक दवाइयां कारगर हो सकती हैं। होम्योपैथी में इसकी कोई पेटेंट दवा नहीं है, क्योंकि होम्योपैथी में रोगी के व्यक्तिगत लक्षणों, मानसिक स्थिति, व्यवहार, विचार, पसंद-नापसंद के आधार पर औषधि का चयन किया जाता है। इसलिए हर रोगी के लिए अलग-अलग औषधि निर्धारित होती है। इसके उपचार में प्रयुक्त होने वाली औषधियों में आर्सेनिक एल्बम, बैसिलिनम, सीकल कार, थूजा, कैलकेरिया कार्ब, ऐंटिम टार्ट, बेलाडोना, इचनेसिया, टेलीयूरिम, फॉस्फोरस आदि प्रमुख हैं। होम्योपैथिक औषधियों का प्रयोग केवल प्रशक्षित सलाह पर ही करना चाहिए। हिन्दुस्थान समाचार/शरद/विद्या कान्त

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