बिजनौर : लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी धामपुर की ऐतिहासिक होली

बिजनौर : लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी धामपुर की ऐतिहासिक होली
bijnor-historic-holi-of-dhampur-became-the-center-of-attraction-of-the-people

कुलदीप त्यागी बिजनौर, 26 मार्च (हि.स.)। जनपद के धामपुर की ऐतिहासिक होली का उत्तरी भारत में महत्वपूर्ण स्थान है। एकादशी से शुरू होकर होली महोत्सव पांच दिन तक चलता है। ब्रज और बरसाना की होली के बाद धामपुर की होली की रंगत देखते ही बनती है। हर कोई रंग में रंगा नजर आता है। बरसाने की लट्ठमार होली पूरे देश में अपना अलग महत्व रखती है। इसे देखने के लिए विदेशों से भी लोग आते हैं। बरसाने की होली के बाद बिजनौर के धामपुर की ऐतिहासिक होली की रंगत भी मशहूर है। लगभग 80 साल से धामपुर में पांच दिन तक विशेष रूप से होली महोत्सव होता है। एकादशी पर जुलूस निकाल कर धामपुर में गीले रंग से होली खेलनी शुरू कर देते हैं। दुल्हैंडी तक होली महोत्सव की धूम मची रहती है। रंग से नहीं बच पाता कोई व्यक्ति बिजनौर के वरिष्ठ पत्रकार हर्यंश्व सिंह सज्जन का कहना है कि धामपुर में होली का रोमांच इतना होता है कि यहां आने वाला कोई भी व्यक्ति बिना रंगे यहां से नहीं जा सकता। होली से एक सप्ताह पहले ही यहां रिश्तेदार आना बंद कर देते हैं। गली-मोहल्लों में तो हुलियारे रंग से खेलते ही है, यहां शोभायात्रा भी निकाली जाती है। रंग एकादशी से होती है शुरूआत आदर्श होली हवन समिति के अध्यक्ष रवि चौधरी का कहना है कि 1940 से पहले होली को धामपुर में लोग अपने घरों में ही मनाते थे। इसके बाद होरी महाराज मंदिर से जुलूस निकलता था। उस समय लोगा कीचड़, काले तेल आदि से होली खेलते थे। 1952 से यहां के लोगों ने विशेष तौर पर होली मनानी शुरू कर दी। होली हवन का विशेष जुलूस निकलना शुरू हुआ। इसमें ट्रैक्टर-ट्राॅलियों में होली हवन और गीले रंग की विशेष व्यवस्था रहती है। होली हवन जुलूस का शुभारंभ विनोद शर्मा आढ़ती के मकान के किनारे से होता है। जबकि रंग जुलूस मंदिर बजरिया ठाकुर द्वारा शुरू होता है। इस परंपरा का आज भी पालन किया जा रहा है। बजरिया के प्रथम उस्ताद के संरक्षण में निकला जुलूस धामपुर में होली का पहला जुलूस मंदिर ठाकुरद्वारा बजरिया के प्रथम उस्ताद जग्गू महाराज के संरक्षण में निकलना शुरू हुआ। रंग एकादशी पर जुलूस की जो परंपरा शुरू हुई, वह आज भी जारी है। जुलस में ड्रम में भरे हुए रंग से हुलियारे सभी रंगों से सरोबार करते हैं। युवाओं इसमें जमकर नाचते हैं और अपने करतब दिखाते हैं। इस होली महोत्सव की खासियत यह है कि इसमें सभी वर्गों के लोग भाग लेते हैं और कोई बुरा नहीं मानता। हिन्दुस्थान समाचार/