सुहागनगरी के शिवचरन भारती मंदिर निर्माण के लिए खाई थी लाठियां, गए थे जेल
सुहागनगरी के शिवचरन भारती मंदिर निर्माण के लिए खाई थी लाठियां, गए थे जेल
उत्तर-प्रदेश

सुहागनगरी के शिवचरन भारती मंदिर निर्माण के लिए खाई थी लाठियां, गए थे जेल

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सुहागनगरी के शिवचरन भारती बोले, राम मंदिर के लिए खाई थी लाठियां आज सपना हुआ साकार फिरोजाबाद, 30 जुलाई (हि.स.)। अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए हुए आंदोलन के दौरान कारसेवा करने वाले सुहागनगरी के शिवचरन भारती पांच अगस्त को मंदिर की आधारशिला रखे जाने से काफी खुश हैं। उनका कहना है कि मंदिर निर्माण के लिए उन्होंने पुलिस की लाठियां खाईं और कई बार जेल भी गए। वर्षों बाद अब वह क्षण आया है जब अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण का सपना साकार हो रहा। शहर के चन्द्रवार गेट नाला के समीप रहने वाले शिवचरन भारती ने बताया कि भगवान श्रीराम के मंदिर के लिए आंदोलन का बिगुल बजने के बाद ही वह सक्रिय हो गए। उन्होंने पुरानी यादों को हिन्दुस्थान समाचार से साझा करते हुये बताया कि राममंदिर निर्माण के लिये अयोध्या से रामज्योति निकली। इस रामज्योति का उद्धेश्य मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के लिये लोगों को जागृत करना था। यह रामज्योति अयोध्या से शहर के गांधी पार्क स्थित गौशाला लायी गई। जहां इस जयोति से दीप जलाकर घर-घर भेजे गये। वह भी रामज्योति का दीपक लेकर जयश्रीराम का जयघोष करते हुये घर जा रहे थे इसी दौरान रास्ते में पुलिस ने उन्हें उनके अन्य साथियों के साथ गिरफ्तार कर रामपुर जेल भेज दिया। इसके बाद राममंदिर निर्माण के लिये जव समर्थन जुटाने के उद्वेश्य से भाजपा के बरिष्ठ नेता लालकृष्ण अड़वाड़ी ने रथयात्रा निकाली तो रथयात्रा के बिहार पहुंचते ही लालकृष्ण अड़वाड़ी को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने बताया कि जव उन्होंने गिरफ्तारी के विरोध में शहर में प्रदर्शन किया तो पुलिस ने उन्हें उनके साथियों के साथ गिरफ्तार कर आगरा जेल भेज दिया। इसके बाद रामंदिर आन्दोलन के लिये शहर के रामलील ग्राउण्ड में लोगों को जागृत करने के लिये एक जलसे का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों लोग एकत्रित हुये। इसी दौरान पुलिस रामलीला मैदान पहुंची और लाठियां बरसाने के बाद उन्हें व कई लोगों को फतेहगढ़ जेल भेज दिया। उन्होंने बताया कि वह कारसेवक के रूप में 5 दिसम्बर 1992 को अयोध्या पहुंच गये थे। 6 दिसम्बर को विवादित ढांचा गिराया। आयोध्या में वहां सात दिन तक कारसेवकपुरम में रहे और उसके बाद 14 दिसम्बर को वापस फिरोजाबाद आये। कहा कि मुझे पूरा विश्वास था कि एक दिन जरूर भव्य राममंदिर बनेगा। आखिर वह दिन आ ही गया। हुण्डावाला बाग निवासी लोकतंत्र सेनानी हरिओउम गुप्ता बताते हैं कि उन्होंने भी राममंदिर आन्दोलन में बढ़ चढ़ कर भाग लिया। कई बार पुलिस की लाठियां भी खाई। लेकिन अब राममंदिर का भव्य निर्माण होने से उनका सपना साकार हुआ है। जिससे उन्हें बेहद खुशी है। हिन्दुस्थान समाचार/कौशल/राजेश-hindusthansamachar.in