जयंती पर भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां याद किये गये, कब्र पर प्रशंसकों ने चढ़ाये अकीदत के फूल

जयंती पर भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां याद किये गये, कब्र पर प्रशंसकों ने चढ़ाये अकीदत के फूल
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वाराणसी, 21 मार्च (हि.स.)। भारत रत्न शहनाई के बेताज बादशाह मरहूम उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की 106वीं जयंती पर रविवार को परिजनों के साथ प्रशंसकों ने शिद्दत से याद किया। फातमान स्थित उनकी कब्र पर पहुंचे प्रशंसकों ने अकीदत के फूल चढ़ाये और अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। परिजनों ने दरगाह पर दुआख्वानी कर फातिहा पढ़ी। कब्र पर फूल चढ़ाने के बाद खिराज़े अक़ीदत पेश किया। इसमें उस्ताद के बेटे नाजिम हुसैन, काजिम हुसैन, बेटी जरीना बेगम, अजरा बेगम, पौत्र आफाक हैदर, इख़्तेखार अहमद, नजमुल हसन, हादी हसन, मजलूम राजा,उस्ताद बिस्मिल्लाह खां फाउंडेशन के प्रवक्ता शकील अहमद जादूगर आदि शामिल रहे। कांग्रेस के नेता और पूर्व विधायक अजय राय भी पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ कब्र पर पहुंचे। उस्ताद के कब्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर पूर्व विधायक ने कहा कि उस्ताद भारत रत्न के साथ ही साथ महान संगीतज्ञ भी थे, काशी में ही पले बढ़े। उनमें बनारसीपन कूट-कूट कर भरा था। इतने महान कलाकार होते हुए भी जिस सादगी का जीवन उन्होंने व्यतीत किया था, वह हर किसी के लिए प्रेरणादायी है। काशी ने पूरे भारत वर्ष को एक से एक महान व्यक्तित्व, संगीतज्ञ, खिलाड़ी, साहित्यकार दिये। उस्ताद बिस्मिल्लाह खां द्वारा संगीत के क्षेत्र में दिए गए उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि जयंती पर प्रदेश सरकार का कोई नुमाइंदा उस्ताद के मकबरे पर नहीं आया। यह बहुत शर्म की बात है। उस्ताद बिस्मिल्लाह खां फाउंडेशन के प्रवक्ता शकील अहमद जादूगर ने बताया कि कभी एक अमेरिका पूंजीपति ने उस्ताद को अमेरिका में बस जाने का न्योता दिया था, जिसे यह कहते हुए उन्होंने ठुकरा दिया कि ’मेरा बनारस यहां बसा दो, गंगा बहा दो मैं खुद-ब-खुद यहां बस जाउंगा’। जादूगर ने बताया कि उस्ताद ने हमेशा फकीरी की जिन्दगी अख्तियार किया अगर वो चाहते तो खूब ऐशो-आराम से रह सकते थे मगर उन्होंने कला की साधना की और उसी हाल में दुनिया से रुख़्सत हुए। गौरतलब हो कि 21 अगस्त 2006 को लम्बी बीमारी के बाद जब उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का इन्तकाल हुआ था। तब देश के तत्कालीन राष्ट्रपति अब मरहूम एपीजे अब्दुल कलाम की मौजूदगी में उन्हें 21 तोपों की सलामी के बाद दरगाह-ए-फातमान में सुपूर्दे-खाक किया गया था। उस समय प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं बल्कि केन्द्र और प्रदेश सरकार के तमाम नुमाइंदे उन्हें खिराज़े अक़ीदत पेश करने पहुंचे थे। हिन्दुस्थान समाचार/श्रीधर/दीपक