बलिया : चिकित्सक ने कविता के जरिए कोरोना के अगले हमलों से किया आगाह

बलिया : चिकित्सक ने कविता के जरिए कोरोना के अगले हमलों से किया आगाह
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बलिया, 22 मई (हि. स.)। कोरोना की दूसरी लहर जब पीक पर थी। कई जगहों पर सड़क ही अस्पताल बन गए और ठेला, टेम्पो व ई रिक्शा बेड की तरह दिख रहे थे। ऐसे में सर्वाधिक चुनौती चिकित्सा से जुड़े लोगों के सामने आई थी। इन्ही चुनौतियों ने शहर के मशहूर चिकित्सक डा. जेपी शुक्ला को कवि बना दिया। उन्होंने कविता के माध्यम से कोरोना को लेकर चेताया है। दरअसल, पिछले दिनों जब जिले में कोरोना के केस सैकड़ों की संख्या में आ रहे थे। कोरोना के लक्षणों वाले मरीजों की बाढ़ आई थी शारदा हॉस्पिटल के संचालक डॉक्टर जेपी शुक्ला के सामने एक ऐसा वाकया आया, जिसने उन्हें झकझोर दिया। उन्होंने 'हिन्दुस्थान समाचार' को बताया कि मेरे हॉस्पिटल के सामने वाली सड़क पर मरीजों को लेकर आने वाले वाहनों की लाइन लग जाती थी। मैं सड़क पर जा जा कर भी मरीजों को देखता था। हुआ यूं कि सड़क पर कुछ मरीजों को देखने के बाद जब लाइन में खड़े मरीजों की बारी आई तो एक नौजवान सामने दिखा। उसे हल्का बुखार और नजला था। उसने पुरानी दवा की पर्ची के नाम पे दुसरी पर्ची मेरे सामने बढ़ा दिया। जिस पर घरेलू सामानों के नाम लिखे थे। इसे देख मैं मुस्कुरा दिया। वह लड़का भी मुस्कुरा उठा। कुछ टेस्ट बाद वह वहीं आकर बैठ गया। उसे बेचैनी और थोरी खांसी थी। आंखें झपक रही थीं। उसके शरीर में तेजी से हो रहे बदलावों को देख मैंने ऑक्सीजन लेवल चेक किया तो 85 प्रतिशत था जो बीस मिनट बाद ही 70 तक आ गया। वह अकेला था। हमारे हॉस्पिटल में ऑक्सीजन खत्म हो गया था। इसलिए मैंने उसे सदर अस्पताल भेज दिया। अगले दिन उसके पिता आए और पूछा मेरे बेटे का मोबाइल कहां हैं ? फिर उन्होंने कहा मेरे बेटे को कैसे मारा ? मैंने मोबाइल लौटा दिया जो मेरे पास रह गया था। डॉक्टर जेपी शुक्ला बताते हैं कि युवक की दी हुई समान की पर्ची जो अब भी मेरे पास है। मुझे हर रोज परेशान करती है। अपनी बात कविता के माध्यम से कहते हुए डा. शुक्ला बोले, यह खौफनाक वाकया अगर किताबों में पढ़ा होता तो शायद यकीन नहीं होता। इस एहसास को रोज महसूसकर रहा हूं। कहा कि युद्ब के बाद ऐसे नजारे तो आम हैं। पर आम दिनों के ये नजारे बहुत परेशान कर रहे हैं। डा. जेपी शुक्ला की कविता के अंश... 'ऐ कोरोना तू भी क्या चीज़ है थप्पड़ गालों पर पड़ा और लब से एक चीख भी नहीं निकली। इसी का नाम कोरोना है। जुल्म की सजा मिले तो समझ में आये बेकसूरी की सजा मिले इसी का नाम कोरोना है। मैं अधीर हो सोचता हूं उस शख्स को किसने मारा। मैंने, मोदी-योगी ने, कोरोना ने या खुद ने? मास्क आपने पहना नहीं, दूरी आपने बनाई नहीं भीड़ से आप बचे नहीं, और पूछते हैं मेरे बेटे को कैसे मारा ? प्रधानी को छोड़िए भीड़ तो हमने जनाजों के पीछे भी देखी। मास्क और हेलमेट में तुम फर्क कर नहीं पाए, कोरोना हमें हो नहीं सकता, ये वहम तुम निकाल नहीं पाए। और पूछते हो मेरे बेटे को कैसे मारा ? डॉक्टर झूठ, मीडिया झूठ, योगी झूठ मोदी झूठ मुद्दे झूठ, देश झूठ, विदेश झूठ सच या तो तेरा वहम था या फिर मजहब अब जब की सच सामने है। मुझसे पूछते हो मेरे बेटे को कैसे मारा ? सिर्फ दो गज की दूरी बनाई होती, मास्क पहना होता भीड़ से बचे होते तो जरुरत न आक्सीजन की होती। सुना है वक्त किसी का नहीं होता, पर मेरी तरफ से तुझे शुक्रिया। दस की रोटी बीस में बंटे तो समझ में आता है। दस की रोटी जब हज़ार में बंटे तो सब्र तो करना ही होगा। मैं एक चिकित्सक हूं, इलाज रोग का है महामारी का नहीं। राहत बढ़ की होती है सुनामी की नहीं। सामना विध्वंस का होता है प्रलय का नहीं। सब्र और भरोसा तू करना जानता नहीं और पूछता है मेरे बेटे को कैसे मारा ? पर अब वक्त आ गया है तू अपने चश्मे का नम्बर थोड़ा बदल दे, तू सच बता ये कोरोना कोई बीमारी है क्या ? नहीं ये विषाणु युद्ध है, पहले बूढ़े गये नौजवानों की बारी जारी है। पर मैं इतना नासमझ नहीं अभी मेरे बच्चोंकी बारी आनी है। अब तक तो फेफड़ों से लड़ रहा था। अब खून के लड़ूंगा। नसें कमजोर होंगी पागलपन होगा किसी को खून की उल्टी होगी, कोई यादाश्त खोयेगा कोई नजर, पर अफसोस कभी हम ऑक्सीजन और सिलेंडर के लिये सड़कों पर होंगे। ए मन तू कितना भोला है, इतना भी नहीं समझता लोग लड़ेंगे सड़कों पर उतरेंगे हमारे बीच के जयचन्द इसे हवा देंगे योगी आप सन्त हैं, मोदी आप फकीर हैं, ऐसा नहीं है कि सच से आप वाकिफ नहीं। जिनकी फितरत में लड़ना लिखा है लड़ें, जिनकी फितरत में सड़कों को जाम करना लिखा है करें, जिनको ऑक्सीजन और वैक्सीन चाहिए बेशक मिले, मेरी आरजू है मेरे हिस्से का पैसा उन तैयारियों को सुपुर्द किया जाय जिसे सरहद कहते हैं। हिन्दुस्थान समाचार/पंकज