कश्मीरियों ने बनवाया था बागेश्वर मंदिर, सोमवार को होगी विशेष पूजा
कश्मीरियों ने बनवाया था बागेश्वर मंदिर, सोमवार को होगी विशेष पूजा
उत्तर-प्रदेश

कश्मीरियों ने बनवाया था बागेश्वर मंदिर, सोमवार को होगी विशेष पूजा

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-कश्मीर से पलायन करने वाले कसौधन समाज के लोग बैलगाड़ी से लाये थे शिवलिंग -अगले दिन शिवलिंग के न उठने पर विधि विधान से इसकी करायी गई थी प्राणप्रतिष्ठा पंकज मिश्रा हमीरपुर, 02 अगस्त (हि.स.)। जनपद के सायर गांव में बागेश्वर मंदिर में सावन मास के आखिरी सोमवार को सामाजिक दूरी के बीच श्रद्धालु जलाभिषेक करेंगे। हालांकि कोरोना महामारी के कारण यहां धार्मिक कार्यक्रमों की धूम नहीं मचेगी। इस मंदिर में शंकर जी का विशेष शिवलिंग स्थित है, जो अद्भुत होने के साथ ही कसौंधन समाज के लिये एक बड़ा तीर्थ स्थल भी है। जिले के मौदहा कस्बे से करीब 10 किमी दूर सायर गांव में स्थित बागेश्वर मंदिर का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है। मौदहा क्षेत्र के अम्बिका प्रसाद का कहना है कि ये शिव लिंग विशेष प्रकार का है, जिसे देखने से ही मन को बहुत शांति पहुंचती है। मंदिर का अद्भुत नजारा देखकर पहली आये श्रद्धालु भी आश्चर्यचकित हो जाते हैं। बताते है कि बरगद के पेड़ की डाली और जड़ों के बीच एक मंदिर का रूप ये स्थान लिये है। इसी में भगवान भोले नाथ का विशेष शिव लिंग स्थापित है। ग्रामीणों ने बताया कि यह एक ऐसा अद्भुत मंदिर है जहां समाज के ही मंदिर की देखरेख करते है। गांव में समाज के अलावा दूरदराज से श्रद्धालु मंदिर में आकर पूजा अर्चना करते हैं। महा शिवरात्रि पर्व पर कश्मीर, महाराष्ट्र, राजस्थान व अन्य महानगरों से कसौंधन समाज के लोग बागेश्वर मंदिर आकर विधि विधान से अनुष्ठान करते हैं लेकिन इस बार सावन मास में कोरोना के कारण यह एतिहासिक मंदिर में सन्नाटा पसरा है। कश्मीर से बैल गाडिय़ों से लाया गया था शिवलिंग कसौंधन समाज के लोगों ने बताया कि सायर गांव में ये मंदिर तीर्थ स्थल से कम नहीं है। सैकड़ों साल पूर्व समाज के पूर्व कसौंधन समाज की बिरादरी को कश्मीर से पलायन करना पड़ा था। उनका एक बड़ा समूह उस जमाने में पलायन किया था। बैल गाडिय़ों से होता हुआ समाज का एक बड़ा समूह सायर गांव में रुका था। बैल गाडिय़ों से शिवलिंग को भी लाया गया था। अगले ही दिन समूह को आगे रवाना होना था लेकिन गांव में जिस स्थान पर शिवलिंग को रखा गया था वह उठाने से भी नहीं उठा था। तभी से शिव लिंग को स्थापित कर एक भव्य मंदिर बनाया गया जहां कसौंधन समाज के लोग कश्मीर से आकर पूजा करते है। संघर्ष के बाद मंदिर और तालाब का हुआ सुन्दरीकरण वरिष्ठ समाजसेवी सलाउद्दीन ने बताया कि बागेश्वर मंदिर के सुन्दरीकरण को लेकर आपसी संघर्ष हुये हैं। मौदहा कस्बे के अम्बिका प्रसाद ने मंदिर और तालाब के सुन्दरीकरण कराने के लिये लगातार प्रयास किये हैं। पूर्व मंत्री बादशाह सिंह ने यहां मंदिर तक पहुंचने के लिये सड़क बनवाई है। वहीं जिला पंचायत सदस्य अजीत कोरी ने भी टीनशेड बनवाया है। मंदिर से लगे तालाब में भी सुन्दरीकरण के तमाम कार्य कराये गये हैं। बाद में आपसी कलह बढ़ने पर समाज के कई लोग पीछे हट गये थे। उन्होंने बताया कि बागेश्वर मंदिर के प्रति समाज और आसपास के कई इलाकों के लोगों की आस्था है। कोरोना के कारण बाहरी राज्यों से नहीं आ रहे श्रद्धालु सावन मास में बागेश्वर मंदिर में गांव के लोग ही सामाजिक दूरी के बीच पूजा अर्चना करते हैं लेकिन यहां कोरोना के कारण सामूहिक रूप से भजन कीर्तन का आयोजन नहीं किया जा रहा है। लोकतंत्र सेनानी देवी प्रसाद गुप्ता ने बताया कि सायर गांव में बागेश्वर मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। इसमें स्थापित शिवलिंग भी अद्भुत है। पूरे उत्तर भारत में इस तरह का शिव लिंग देखने को नहीं मिलेगा। खासकर कसौंधन समाज के लोग हर साल मंदिर में बड़ा कार्यक्रम आयोजित कराते हैं। मेले की भी धूम मचती है लेकिन इस बार कोरोना वायरस महामारी के कारण मंदिर में धार्मिक कार्यक्रमों पर ग्रहण लगा है। हिन्दुस्थान समाचार/पंकज/दीपक-hindusthansamachar.in