बाबा काल भैरव की शोभायात्रा एवं श्रृंगार 12 जुलाई को, कोविड प्रोटोकाल का होगा पालन

बाबा काल भैरव की शोभायात्रा एवं श्रृंगार 12 जुलाई को, कोविड प्रोटोकाल का होगा पालन
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वाराणसी, 20 जून (हि.स.)। काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव के स्वर्ण रजत प्रतिमा का भव्य श्रृंगार और शोभायात्रा की तैयारियां शुरू हो गई है। आषाढ़ सुदी द्वितीय तदनुसार 12 जुलाई को बाबा की शोभायात्रा निकलेगी। शोभायात्रा को लेकर रविवार को स्वर्णकार क्षत्रिय कमेटी के सदस्यों ने दारानगर स्थित नंद भवन में बैठक की। बैठक में कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद किशोर कुमार सेठ ने कहा कि शोभायात्रा में कोविड-19 नियमों के अनुरूप सभी कार्यक्रम संपन्न किए जाएंगे। मंदिर में भव्य श्रृंगार पर पूजन किया जायेगा। जिला प्रशासन से अनुमति प्राप्त करने के लिए कमेटी के उपाध्यक्ष अधिवक्ता दुर्गा प्रसाद, सुरेंद्र कुमार सेठ, विशाल सेठ को दायित्व सौंपा गया। बैठक में कमेटी के पूर्व अध्यक्ष गणेश सेठ, कमेटी के मंत्री शैलेश वर्मा के बड़े भाई मारकंडेय वर्मा, कमेटी के आय-व्यय निरीक्षक भगवान दास सेठ की माताजी के निधन पर 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। 1954 से निकल रही शोभयात्रा स्वर्णकार क्षत्रिय कमेटी के किशोर सेठ ने बताया कि वर्ष 1954 से बाबा काल भैरव के स्वर्ण रजत प्रतिमा की भव्य शोभायात्रा निकालने की परम्परा चली आ रही है। चौखम्भा स्थित काठ की हवेली से गाजे बाजे के बीच फूलों से सुसज्जित रथ पर बाबा की स्वर्ण रजत प्रतिमा की शोभायात्रा निकलती है। रथयात्रा मेले के पहले दिन निकलने वाली शोभायात्रा बीबी हटिया, जतनबर, दूधकटरा, विश्वेश्वरगंज, महामृत्युंजय दारानगर, मध्यमेश्वर, मैदागिन, बुलानाला, चौक, ठठेरी बाजार, सोराकुआं, गोलघर, भुतही इमली होते हुए बाबा कालभैरव मंदिर पहुंचती है। शोभायात्रा के स्वागत के लिए जगह-जगह तोरणद्वार भी बनाया जाता है। हिन्दुस्थान समाचार/श्रीधर

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