बापू की पुण्यतिथि पर कुष्ठ रोगियों में फल वितरण, जागरूकता अभियान

बापू की पुण्यतिथि पर कुष्ठ रोगियों में फल वितरण, जागरूकता अभियान
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वाराणसी,30 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि शनिवार को राष्ट्रीय कुष्ठ निवारण दिवस के रूप में मनाई गई। जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों, नगरों व वार्डों में कुष्ठ जागरुकता के लिए जिलाधिकारी का संदेश पढ़ा गया। इसी तरह का कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में भी हुआ। इस दौरान नुक्कड़ नाटक, क्विज प्रतियोगिता एवं पम्पलेट्स वितरण भी किया गया। संकट मोचन स्थित कुष्ठ आश्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ वीबी सिंह के अगुवाई में बापू के चित्र पर पुष्प कर कुष्ठ रोगियों में मेडिकल किट, फल आदि का वितरण किया गया । -कुष्ठ जागरूकता अभियान 13 फरवरी तक चलेगा जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि जनपद में स्पर्श कुष्ठ रोग जागरूकता अभियान का शुभारम्भ शनिवार से हो गया। ये अभियान 13 फरवरी तक चलाया जाएगा। अभियान में विभिन्न आयोजन किए जाएंगे। जिसमें लोगों में कुष्ठ के प्रति जागरूकता आ सके। उन्होंने बताया कि इस वर्ष जिले में कुष्ठ से 71 मरीजों को मुक्ति मिली है। अप्रैल 2020 से अब तक 67 मरीज मिले हैं। जनपद में मौजूदा समय में कुष्ठ रोग के 58 मरीज हैं। जिनका सफलतापूर्वक इलाज किया जा रहा है। कुष्ठ रोग से मुक्ति के लिए समय पर इलाज कराना जरूरी है। क्या है कुष्ठ रोग . कुष्ठ रोग अन्य बीमारियों की तरह ही है, जो माइक्रोबैक्टीरिया लेप्रे नामक जीवाणु के संक्रमण से होता है । जो त्वचा व तंत्रिकाओं को प्रभावित करता है। यह समय से जांच और इलाज से पूरी तरह ठीक हो जाता है। डा. राहुल सिंह ने बताया कि शरीर के किसी भाग पर गुलाबी धब्बे आना, सुन्नपन, उस जगह को महसूस नहीं कर पाना, उस स्थान पर पसीना नहीं आना, गांठ पड़ जाना या किसी नस का जरूरत से ज्यादा कड़ा या मोटा हो जाना कुष्ठ रोग के लक्षण होते हैं। यह दो प्रकार का होता है। पोसीवेस्लरी और मल्टीवेस्लरी कुष्ठ रोग। पहले वाले प्रकार में शरीर पर 5 या उससे कम दाग हों तो उसे इस श्रेणी में डाला जाता है। इस रोग में इन्फेक्शन कम होता है और इसका इलाज 6 माह में पूरा हो जाता है।. मल्टीवेस्लरी कुष्ठ से शरीर पर 5 से अधिक धब्बे होने पर उसे इस श्रेणी में रखा जाता है। यह नस को भी प्रभावित करता है। जिससे नस में मोटापन या कड़ापन आता है। इसका इलाज 12 माह चलता है। उन्होंने बताया कि अगर समय रहते इसका इलाज नहीं होता है तो दिव्यांगता हो सकती है। कई मामलों में सर्जरी से दिव्यांगता भी दूर नहीं की जा सकती है। यह रोग छूने और हाथ मिलाने से नहीं फैलता है। रोगी के लगातार संपर्क में रहने से यह रोग फैलता है। किसी को भी इस तरह के लक्षण दिखने पर अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल पर संपर्क करना चाहिए। सभी सरकारी अस्पतालों में कुष्ठ रोग से संबन्धित दवाएं निशुल्क उपलब्ध हैं। हिन्दुस्थान समाचार/श्रीधर-hindusthansamachar.in