उप्र में अपराधियों की ओर से सत्ता संरक्षित संगठित सिंडीकेट का हो रहा संचालन : अखिलेश यादव
उप्र में अपराधियों की ओर से सत्ता संरक्षित संगठित सिंडीकेट का हो रहा संचालन : अखिलेश यादव
उत्तर-प्रदेश

उप्र में अपराधियों की ओर से सत्ता संरक्षित संगठित सिंडीकेट का हो रहा संचालन : अखिलेश यादव

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-सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, भाजपा का जंगलराज बेटियों के लिए काल साबित हो रहा लखनऊ, 14 जुलाई (हि.स.)। भाजपा शासन में उत्तर प्रदेश में सड़क से लेकर जेल तक अपराधियों द्वारा सत्ता संरक्षित संगठित सिंडीकेट संचालित किए जा रहे हैं। सिद्धार्थनगर जिला कारागार में कैदियों द्वारा कमीशन देकर जेल में रकम मंगवाने का रैकेट सामने आया है। सत्ता की हनक के चलते भाजपा नेता, रिश्तेदार अपनी मनमर्जी के मालिक बन बैठे हैं। उन्हें कानून का कतई डर नहीं है। ये बातें समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को कही। उन्होंने कहा कि भाजपा का जंगलराज बेटियों के लिए काल साबित हो रहा है। नोएडा के बोर्डिंग स्कूल में नाबालिग से रेप के बाद उसकी हत्या कर शव को लटका दिया गया। परिवार को बिना बताए उसके शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। प्रयागराज में दारोगा के दो बेटों ने दोस्तों संग मिलकर एक किशोरी से दुष्कर्म किया। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट काल में सरकार लोगों में सुरक्षा, रोजगार और भविष्य के प्रति सकारात्मक रवैया दिखाने में पूर्णतः विफल रही है। गोरखपुर में रविवार को सहजनवां में एक युवक ने जहर खा लिया। बड़हलगंज एरिया में महिला ने फांसी लगा ली। यहां एक हफ्ते के भीतर 11 लोगों ने जान गंवाई। आज बाराबंकी में थाना नगर कोतवाली क्षेत्र में एक परिवार में पति-पत्नी, दो मासूम बच्चों सहित चार लोग संदिग्ध स्थिति में मृत पाए गए। अखिलेश यादव ने कहा कि अपराधों को रोकने के लिए पुलिस संस्था को सुदृढ़ करना चाहिए। समाजवादी सरकार के कार्यकाल में विश्वस्तरीय यूपी डायल 100 नंम्बर की व्यवस्था की गई थी, उसका इस्तेमाल अपराध नियंत्रण में क्यों नहीं किया जा रहा है? इसे नई गाड़ियां दी गई थीं ताकि अपराध स्थल पर तत्काल पुलिस बल पहुंचकर पीड़ित की मदद कर सके। अपराधियों को राजनीति में आने से रोकना चाहिए। समाजवादी पार्टी ने खराब छवि वालों को टिकट न देने का निर्णय बहुत पहले ही ले लिया है। पारदर्शी एवं स्वच्छ राजनीति के लिए राजनीतिक दलों एवं सरकार को स्वस्थ परम्पराओं का निर्वाह करना ही होगा। सार्वजनिक जीवन की ऐसी व्यवस्था ही समाज और राष्ट्र के हित में है। हिन्दुस्थान समाचार/उपेन्द्र/दीपक/राजेश-hindusthansamachar.in