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जकात के फर्ज को इंकार करने वाला मुसलमान हो जाएगा इस्लाम से खारिज : मुफ्ती कासमी

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जकात के फर्ज को इंकार करने वाला मुसलमान हो जाएगा इस्लाम से खारिज : मुफ्ती कासमी - इस्लाम के पांच आधारभूत सिद्धांतों में एक ज़कात भी है कानपुर, 28अप्रैल (हि.स.)। रमजान का पवित्र माह इन दिनों चल रहा है। इसमें लोग तीस दिन रोजे रखते हैं और साथ ही खूब जकात भी निकालते है। शरीअत के मुताबिक जकात उन मुसलामनों पर फर्ज है जो साहिब-ए -निसाब हैं। साहिब-ए-निसाब वो औरत या मर्द होता है, जिसके पास साढ़े सात तोला सोना (87.5 ग्राम सोना) या साढ़े 52.5 तोला चांदी हो या फिर इतनी कीमत की संपत्ति है तो उस इंसान को अपनी कुल बचत का 2.5 फीसदी जकात के तौर पर देना होगा। जकात के फर्ज होने की बात कुरआन व हदीस से साबित है, जो भी जकात के फर्ज होने का इंकार करें वह इस्लाम से खारिज हो जाएगा। यह बातें बुधवार को जमीअत उलमा शहर कानपुर के सेक्रेटरी मुफ्ती इजहार मुकर्रम कासमी ने कही। मुफ्ती इजहार ने कहा कि अगर किसी के पास सोने या चांदी के अलावा नकदी या बैंक बैलेंस भी है, तो उन पर भी जकात अदा करनी होगी। शरीयत ने दुनिया के मौजूदा सिस्टम की तरह आमदनी पर टैक्स नहीं लगाया, यानी अगर आपकी लाखों रुपए की आमदनी है लेकिन वह खर्च हो जाते हैं तो कोई जकात वाजिब नहीं, बल्कि जरूरीयात ए जिंदगी से बचना, बचे हुए माल का निसाब को पहुंचना, और उस पर 1 साल गुजर ना तब जाकर जकात वाजिब होता है। रमजान माह के अलावा भी निकाल सकते है जकात उन्होंने बताया कि जकात का रमजान महीने में निकालना जरूरी नहीं है, बल्कि अगर हमको साहिब ए निसाब बनने की तारीख मालूम है, तो एक साल गुजरने पर फौरन जकात अदा कर देनी चाहिए, चाहे कोई सा महीना हो, मगर लोग अपने साहिब ए निसाब बनने की तारीख से आम तौर पर नावाकिफ होते हैं। रमजान के महीने में 70 गुना ज्यादा मिलता है सवाब मुफ़्ती इजहार ने बताया रमजान में एक नेकी का सवाब 70 गुना मिलता है, इसलिए लोग रमजान में जकात निकालने का एहतमाम करते हैं। जकात एक साल मुकम्मल होने से पहले भी निकाली जा सकती है, और अगर किसी वजह से देर हो जाए तो भी जकात अदा हो जाएगी, लेकिन जानबूझकर देर करना सही नहीं है। जो शख्स अमीर होकर भी जकात से जी चुराता है वो अल्लाह की नाराजगी हासिल करता है। इसलिए हर साहिब ए हैसियत इंसान को जकात देना चाहिए। हिन्दुस्थान समाचार/महमूद/मोहित