लड़कियों को निर्बाध रुप से शिक्षा से जोड़े रखने को बुन्देलखण्ड में ’बैक टू स्कूल अभियान

लड़कियों को निर्बाध रुप से शिक्षा से जोड़े रखने को बुन्देलखण्ड में ’बैक टू स्कूल अभियान
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- राईट टू एजुकेशन (आरटीई) फोरम की अगुवाई में सातों जिलों में ग्रासरूट शिक्षा अधिकार कार्यकर्ताओं का बड़ा लक्ष्य झांसी, 24 फरवरी (हि.स.)। बुन्देलखण्ड के सभी सातों जनपदों में स्कूल जाने वाली उम्र की सभी लड़कियों को स्कूल लानें के लिये वृहद अभियान ’बैक टू स्कूल कैंपेन’ संचालित किया जा रहा है। 24 फरवरी से 31 मार्च तक बुन्देलखण्ड के झाँसी जनपद में इस अभियान को आरटीई फोरम, बुन्देलखण्ड शिक्षा का अधिकार फोरम व लक्ष्य सेवा समिति के द्वारा संचालित किया जायेगा। इसकी जानकारी देते हुए प्रहलाद सुरोठिया ने बताया कि अभी भी पूरें देश में करीब 3 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर हैं। इससे बुन्देलखण्ड का झांसी जिला भी अछूता नही हैं। हमारी मांग है कि सभी स्कूल जाने वाली उम्र की लड़कियां स्कूल में हों। हर लड़की को कम से कम बारहवीं तक की शिक्षा मिले और लड़कियों की पढ़ाई बिल्कुल बाधित न हो और वे नियमित स्कूल जाएं। इसके लिये समुदाय को जागरूक करने, लड़कियों को प्रेरित करने, के लिये बैक टू स्कूल अभियान संचालित किया जायेगा। समुदाय, लड़कियों, शिक्षकों-शिक्षिकाओं व अन्य हितगामियों के साथ बैठकें, कार्यशालाओं, चर्चा आदि के माध्यम से उन्हें इसके प्रति संवेदित व जागरूक किया जाएगा। जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, शासन प्रशासन के साथ चर्चा करके शिक्षा के अधिकार कानून के प्रावधानों के अनुसार विद्यालयों में सुविधाओं आदि के लिये भी प्रयास किया जायेगा। आरटीई फोरम (राइट टू एजुकेशन फोरम) के राष्ट्रीय संयोजक अम्बरीष राय की अगुवाई में बैक टू स्कूल अभियान की शुरुआत बुन्देलखण्ड क्षेत्र में 24 फरवरी से की जा रही है। 31 मार्च तक संचालित होने वाले इस अभियान के बारे में अधिक जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि 46 प्रतिशत स्कूलों में अभी पीनेे के पानी, हाथ धोेने की व्यवस्था, एवं उपयोगी शौचालयों की कमी हैं। केन्द्र सरकार के द्वारा शिक्षा के सम्पूर्ण बजट में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में तकरीबन 6.1 प्रतिशत की कटौती की गई है। स्कूली शिक्षा और समग्र शिक्षा अभियान (38860 करोड़ के मुकाबले सिर्फ 31050 करोड़ रुपए आवंटित) के बजट में भी भारी कटौती हुई है। जुलाई 2020 में आई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी सभी को बारहवीं तक शिक्षा प्रदान करने की बात की गई हेै किन्तु कोराना काल के आंकड़े व अनुभव बताते हैं कि स्कूल जाने वाली उम्र के लड़के-लड़कियां स्कूल छोड़ रहे हैं। ऐसे में उन्हें स्कूल लाने की जरूरत हैं। बैक टू स्कूल अभियान इस मकसद को काफी हद तक पूरा करेगा। इस अवसर पर सुनील राजपूत, मयंक श्रीवास्तव,विवेक गोस्वामी, शेख अरशद, उर्मिला पटैरिया, नितेश तिवारी, अनुराग सिसोदिया, आदि लोग उपस्थित रहे। अभियान की साथी सामाजिक संस्थाएं अभियान में ये संस्थाएं सहभागिता निभा रही हैं। महोबा से ग्रामोन्नति संस्थान,चित्रकूट से सामाजिक विकास संस्थान, इरादा फाउण्डेशन, प्रगति पथ, जन कल्याण शिक्षा प्रसार समिति,ललितपुर से साई ज्योति संस्था, ग्रामोत्थान सेवा समिति,झांसी से लक्ष्य सेवा समिति,उपमान महिला विकास संस्था,जालौन से सदभावना विकास समिति,हमीरपुर से समर्थ फाउण्डेशन, शिक्षा सहेली व बांदा से दिशा सामाजिक संस्था, ग्राम उन्मेष संस्था इस अभियान में कदम से कदम मिलाकर साथ दे रही हैं। हिन्दुस्थान समाचार/महेश