हाईकोर्ट ने मध्यमवर्गीय लोगों को आसान न्याय के लिए जारी की बेवसाइट
हाईकोर्ट ने मध्यमवर्गीय लोगों को आसान न्याय के लिए जारी की बेवसाइट
उत्तर-प्रदेश

हाईकोर्ट ने मध्यमवर्गीय लोगों को आसान न्याय के लिए जारी की बेवसाइट

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प्रयागराज, 17 सितम्बर (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मध्यमवर्गीय आय के लोगों को सस्ता, सुलभ व आसानी से न्याय पाने के लिए अपनी एक आफिसियल वेबसाइट लांच की है। इसका नाम रखा गया है “इलाहाबाद हाईकोर्ट मिडिल इन्कम ग्रुप लीगल एड सोसाइटी“। हाईकोर्ट ने सोसाइटी को सुप्रीम कोर्ट की योजना के भाग के रुप में लांच किया है। इस सोसाइटी का काम होगा कि वह मिडिल इन्कम ग्रुप में आने वाले लोगों को कानूनी राय देने की व्यवस्था करेगा तथा आवश्यकता होने पर कोर्ट में उनका प्रतिनिधित्व करें। हाईकोर्ट की तरफ से जारी इस स्कीम के अनुसार मिडिल इन्कम ग्रुप में उन्हीं को शामिल किया गया है जिनकी कुल वार्षिक आय 6 लाख व 12 लाख के बीच हैं। यही लोग इस समिति की सेवा पाने के लिए हकदार होगें। इस मिडिल इन्कम ग्रुप लीगल एड सोसाइटी का काम होगा कि वह इसके हकदार लोगों को विधिक सहायता, उनकी काउन्सिलग, विधिक उपचार व आवश्यकता होने पर कोर्ट में उनका प्रतिनिधित्व करें। इस मिडिल इन्कम ग्रुप के लोगों को यह लाभ हाईकोर्ट के अलावा मेडिएशन व कन्सिलिएशन सेन्टर व आर्बिट्रेशन के मामलों में भी मिलेगा। इस सेवा की विशेषता यह है कि इसका लाभ दूर दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी देने की व्यवस्था की गयी है। इसके लिए यह सुविधा हकदार लोगों को ई-मेल, वीडियो काल, या सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिए उपलब्ध कराया जाएगा। इसका मकसद है कि लोगों को अनावश्यक यात्रा न करना पडे। इसका लाभ वृद्ध, विकलांग व यात्रा के अयोग्य अन्य लोगों को भी मिलेगा। इस सुविधा का लाभ व राय मशविरा का कोई खर्च नहीं है। यह फ्री आफ कास्ट होगा। केवल कोर्ट में केस का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक निर्धारित टोकेन राशि चार्ज होगा। इस सुविधा की आफिसियल वेबसाइट हिंदी व अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में उपलब्ध होगी। इसका लाभ पाने के लिए हकदार लोगों को अपनी बात व परेशानी विस्तार से आफिसियल वेबसाइट पर भेजना होगा। भेजने के 15 दिन के भीतर उस अर्जी की स्वीकृति अथवा अस्वीकृति सम्बन्धी आदेश याची को मिल जाएगा। यदि भेजी गयी अर्जी खारिज होती है तो उस व्यक्ति को एक पैनल का नामित वकील खारिज होने के कारण से प्रार्थी को अवगत कराएगा। और यदि अर्जी स्वीकार होती है तो उस दशा में पैनल का अधिवक्ता सूचित करेगा तथा उसके बाद अधिवक्ता व वादकारी की इसके लिए निर्धारित समय पर मीटिंग होगी। हिन्दुस्थान समाचार/आर.एन/राजेश-hindusthansamachar.in