सरकार ने कोविड-19 आपदा में रेल कर्मचारियों को लाभों से किया वंचित : महामंत्री
सरकार ने कोविड-19 आपदा में रेल कर्मचारियों को लाभों से किया वंचित : महामंत्री
उत्तर-प्रदेश

सरकार ने कोविड-19 आपदा में रेल कर्मचारियों को लाभों से किया वंचित : महामंत्री

news

- मांगे न मानने पर होगी हड़ताल, एनसीआरईएस की वर्किंग कमेटी में कई मुद्दों पर हुई चर्चा झांसी, 14 अक्टूबर (हि.स.)। कोरेना महामारी के कारण संपूर्ण लॉकडाउन में भी रेल कर्मचारियों ने पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ कार्य किया, ताकि देश की जनता को किसी प्रकार से परेशानी न हो। दूसरी ओर मजदूर विरोधी सरकार ने इस गंभीर आपदा के समय रेल कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते के भुगतान एवं रिक्तियों के भरने पर रोक लगाकर उन्हें आर्थिक लाभ व प्रमोशन से वंचित कर दिया। इसके अतिरिक्त यात्री गाड़ियों के संचालन का कार्य निजी हाथों में सौंपकर रेल का नुकसान किया। यदि हमारी मांगे नहीं मानी गई तो हड़ताल करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। यह बात बुधवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए नार्थ सेन्ट्रल रेलवे इम्प्लाइज संघ के महामंत्री आर पी सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि 29 सितंबर 2020 को आरबीई 83 जारी कर 43600 रूपये से अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के रात्रि भत्ते के भुगतान पर रोक लगा दी। जिससे कर्मचारियों में जमकर आक्रोश व्याप्त है। रेल मंत्रालय भारत सरकार के उपरोक्त सभी मजदूर विरोधी निर्णयों के कारण समस्त रेल कर्मचारियों में आक्रोश है। जिसके कारण नार्थ सेन्ट्रल रेलवे इम्प्लाइज संघ की वर्किंग कमेटी में निर्णय लिया कि 2 से 5 नवम्बर तक लंच के समय प्रयागराज, झांसी और आगरा मंडल में नार्थ सेन्ट्रल रेलवे इम्प्लाइज संघ की सभी शाखाओं के पदाधिकारी और डेलीगेट अपने-अपने कार्य क्षेत्र में सरकार के निर्णय का विरोध करेंगे। 6 नवम्बर को तीनों मंडल के मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के गेट पर जुलूस के रूप में पहुंचकर मंडल रेल प्रबंधक को ज्ञापन सौंपेंगे। अगर इसके बाद भी मांगे नही मानी गई तो जल्द कर्मचरियो के बीच जाकर हड़ताल पर निर्णय लिया जाएगा। इस मौके पर अध्यक्ष रामकुमार सिंह, विवेक चड्डा, टीपी सिंह, भानु प्रताप सिंह, सरिता दास, आरती तोमोरी, पवन झाड़खाडिया आदि उपस्थित रहे। अंत मे सभी का आभार मीडिया प्रभारी उमर खान ने व्यक्त किया। यह है प्रमुख मांगे डीए/डीआर रोकने का आदेश रद्द किया जाए, रात्रि भत्ते के भुगतान संबंधी रेलवे बोर्ड के आदेश पर रोक लगाई जाए। पदों को सरेंडर करना बंद कर पात्र कर्मचारियों को प्रमोशन का लाभ दिया जाए। औद्योगिक संबंध कोड 2020 वापस लेकर यूनियनों के मान्यता के लिए उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार चुनाव कराया जाए। यात्री गाड़ियों को निजी हाथों में देने का निर्णय वापस लिया जाए। एनपीएस रद्द किया जाए। ट्रैकमैन एवं संरक्षा के समस्त कर्मचारियों को बढे हुए रिस्क एवं हार्डशिप एलाउंस का भुगतान अविलंब किया जाए। ग्रेड पे 2400 को 2800 ग्रेड पे और 4600 को 4800 में मर्ज किया जाए और रनिंग कर्मचारियों को ग्रेड पे 4600 दिया जाए। ट्रैक मेंटेनर को टेक्नीशियन कैडर के समान लेवल 6 ग्रेड पे 4200 तक प्रमोशन चैनल दिया जाए। ग्रुप सी के अपेक्स ग्रेड को ग्रुप बी में अपग्रेड किया जाए। 30 वर्ष की सेवा और 50-55 वर्ष की उम्र पर जबरन रिटायर करना बंद किया जाए। महिलाओं की सुविधा के लिए फ्लेक्सी वर्किंग हावर लागू किया जाए और कार्यस्थल पर टॉयलेट एवं ड्रेस चेंजिंग रूम की व्यवस्था की जाए आदि मांगे प्रमुख है। हिन्दुस्थान समाचार/महेश-hindusthansamachar.in