संगठित अपराधों पर अंकुश लगाना होगी प्राथमिकता : डीआईजी
संगठित अपराधों पर अंकुश लगाना होगी प्राथमिकता : डीआईजी
उत्तर-प्रदेश

संगठित अपराधों पर अंकुश लगाना होगी प्राथमिकता : डीआईजी

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- कानपुर का रहा बेहतर कार्यकाल, खौफ में रहे अपराधी कानपुर, 16 जून (हि.स.)। अपराधियों पर खौफ पैदा करने के लिए समय-समय पर रणनीति बदलनी पड़ती है। खासकर संगठित अपराध को रोकने के लिए कई बिन्दुओं पर फोकस करना पड़ता है। इस तरह का अपराध रोकना बेहद कठिन चुनौती भी होती है और एसटीएफ में रहकर काफी चीजों को सीखा भी है। ऐसे में दोबारा एसटीएफ में जाने पर संगठित अपराध को रोकना पहली प्राथमिकता होगी। यह बातें मंगलवार को डीआईजी एसटीएफ लखनऊ बनाये गये कानपुर के डीआईजी/एसएसपी रहे अनंत देव ने कही। उन्होंने बताया कि अपराध दो प्रकार के होते हैं, एक तो व्यक्ति आवेश में आया और अपराध कर बैठा। ऐसे अपराध को रोकना कठिन होता है, क्योंकि यह अपराध व्यक्ति के मन में नहीं होता पर कर बैठता है। हालांकि जब कानून का खौफ होता तो ऐसे भी अपराध में कमी जरुर होती है। दूसरी तरह का अपराध सोची समझी रणनीति के तहत होता है और इस तरह के अपराध से समाज को काफी नुकसान भी पहुंचता है। ऐसे अपराधों को रोकना एसटीएफ की कड़ी चुनौती होती है। उन्होंने कुख्यात डाकू शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ इनकाउंटर का जिक्र करते हुए बताया कि ददुआ के इनकांउटर के लिए कई प्रकार की रणनीति बनायी गयी तभी पाठा क्षेत्र में उसके आतंक का अंत हो सका। उन्होंने बताया कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक अथवा अन्य लाभों के लिये तीन या इससे अधिक व्यक्तियों का संगठित दल, जो गंभीर अपराध करने के लिये कुछ समय से एकजुट होते हैं, संगठित अपराध की श्रेणी में आता है। परंपरागत संगठित अपराधों में अवैध शराब का धंधा, अपहरण, जबरन वसूली, डकैती, लूट, ब्लैकमेल, माफिया आदि का व्यवसाय शामिल किया जाता है। गैर-पारंपरिक अथवा आधुनिक संगठित अपराधों में मनी लॉन्ड्रिंग, जाली नोटों का वितरण, हवाला कारोबार, साइबर अपराध, मानव तस्करी, हथियारों एवं मादक पदार्थों की तस्करी आदि को शामिल किया जाता है। हिन्दुस्थान समाचार/अजय/मोहित-hindusthansamachar.in