शिमला मिर्च : इम्यूनिटी बूस्ट के साथ ही खेती से होगी अच्छी कमाई
शिमला मिर्च : इम्यूनिटी बूस्ट के साथ ही खेती से होगी अच्छी कमाई
उत्तर-प्रदेश

शिमला मिर्च : इम्यूनिटी बूस्ट के साथ ही खेती से होगी अच्छी कमाई

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-कृषि वैज्ञानिक ने कहा, किसानों को उन्न्तशील खेती पर देना चाहिए ध्यान - इस समय शिमला मिर्च लगाएं किसान, देगा अच्छा फायदा लखनऊ, 22 नवम्बर (हि.स.)। शरीर में इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में अच्छा कार्य करने वाला शिमला मिर्च सिर्फ शरीर के लिए ही नहीं, खेती करने पर यह आमदनी का भी अच्छा जरिया है। पारंपरिक खेती से हटकर खेती करने में ही किसान ज्यादा लाभ कमा सकते हैं। इन खेती में प्रमुख शिमला मिर्च भी है। शिमला मिर्च साल में तीन बार बोया जा सकता है। उसमें एक मौसम नवम्बर और दिसम्बर भी है। इसकी खेती से किसान को एक एकड़ में चार लाख तक शुद्ध आमदनी हो सकती है। इसके लिए बाजार भी हर जगह उपलब्ध है। हां, बीज को बोने से पूर्व ढाई ग्राम थाइरम या बाविस्टिन से उपचारित कर देना चाहिए, जिससे बीज रोग ग्रस्त न होने पाये। इसके बाद क्यारियों में इसे 10 की कतार में लगाना उपयुक्त होता है। इस संबंध में सीमैप के कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेश वर्मा ने बताया कि एक एकड़ में शिमला मिर्च की उपज 40 से 60 क्वींटल तक ली जा सकती है। तीन से चार महीने में किसान इससे अच्छी कमाई कर लेते हैँ। इतना जरूर है कि इसमें किसानों को अच्छी पूंजी लगाने की जरूरत होती है, जिससे वह रोग ग्रस्त न हो। उन्होंने कहा कि शिमला मिर्च की खेती में अर्का, गौरव, अर्का मोहिनी, कैलिफोर्निया, वंडर, ऐश्वर्या आदि उन्नत किस्में है। किसानों को उन्नतशील बीजों का ख्याल जरूर करना चाहिए। डॉ. राजेश वर्मा ने बताया कि शिमला मिर्च की नर्सरी के बाद रोपाई के समय पौधे-पौधे की दूरी 60-46 सेमी रखनी चाहिए। पौधे को रोपने से पहले उसके जड़ को एक लीटर पानी में एक ग्राम बाविस्टिन को घोल कर उसमें डुबो कर आधा घंटा के लिए छोड़ देना चाहिए। इससे वह रोग मुक्त हो जाता है और खेत में लगाने पर तुरंत लग जाता है। कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि इसके रोगों में प्रमुख रूप से माहू, थ्रिप्स, सफेद मक्खी और मकड़ी हैं। इन सभी कीटों से बचाने के लिए सवा लीटर पानी में डायमेथेएट या मेलाथियान को घोल तैयार कर हर 15 दिन के अंतराल पर दो बार छिड़काव करें। इसके अलावा नर्सरी में आर्द्र गलन रोग के लिए बीजों को उपचारित करना चाहिए। उकठा रोग के लिए 15 किग्रा ब्लीचिंग पाउडर को प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना उपयुक्त होता है। बीएचयू के पंचकर्म विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जेपी सिंह ने बताया कि शिमला मिर्च में विटामिन ए, विटामिन सी, फलेवानाइॅड्स, अल्कालॉइड्स व टैनिन्स आदि पाए जाते हैं। शिमला मिर्च में मौजूद अल्कालॉइड्स एंटी−इंफलेमेटरी, एनलजेस्टिक व एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है। शिमला मिर्च में विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में होता है। यह विटामिन सी इम्युन सिस्टम को बूस्ट अप करने का काम करता है। प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने के साथ−साथ यह डैमेज ब्रेन टिश्यू को रिपेष्र करने, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने, अस्थमा व कैंसर जैसी बीमारियों से भी राहत पहुंचाता है। हिन्दुस्थान समाचार/उपेन्द्र-hindusthansamachar.in