शारदीय नवरात्रि में मूर्ति को दूर से प्रणाम करेंगे भक्त
शारदीय नवरात्रि में मूर्ति को दूर से प्रणाम करेंगे भक्त
उत्तर-प्रदेश

शारदीय नवरात्रि में मूर्ति को दूर से प्रणाम करेंगे भक्त

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कानपुर, 16 अक्टूबर (हि.स.)। कोविड प्रोटोकाल के तहत इस बार के शरदीय नवरात्रि मनाए जांएगे। इसके लिए जिला प्रशासन के साथ माता के मन्दिरों के प्रबंधतन्त्रों ने पूरी तैयारी कर ली है। शनिवार से प्रारम्भ हो रहे इस बार के नवरात्रि में मन्दिरों में विशेष प्रकार के प्रबंध किए गए हैं। भक्तों को माता के दर्शन के लिए जहां मूर्ति को स्पर्श करने की इजाजात किसी को नहीं दी जाएगी तो वहीं सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन भी करना अनिवार्य रखा गया है। चेहरे पर मास्क के बिना तो मन्दिर के भीतर ही प्रवेश करने का मौका नहीं दिया जाएगा। शहर के प्रमुख दुर्गा मन्दिरों में शुक्रवार को कोविड प्रोटोकाल के लिए बनाए गए आवश्यक नियमों के तहत दिन भर तैयारियों का दौर चला। बिरहाना रोड स्थित माता तपेश्वरी, किदवईनगर में जंगली देवी मन्दिर, बर्रा में माता वैष्णों के मन्दिर, बारा देवी स्थित बराह देवी मन्दिर में वहां के प्रबंधतन्त्र की ओर से तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। यहां सीमित संख्या् में भक्तों को मन्दिर के भीतर प्रवेश तो दिया जाएगा, लेकिन मूर्तियों को छूने की इजाजत नहीं दी जाएगी। बाजारों में देवी मैया की पूजन सामग्री के लिए लोग खरीदारी करते नजर आए हैं। बाजारों में मेवा फल फूल दूध घी आदि की दुकानों में भक्तों का तांता सुबह से शाम तक लगा रहा। वही मंदिरों में साफ-सफाई का दौर दिनभर चलता रहा। घरों में मैया की स्थापना के लिए भक्त तैयारी करते रहे। शनिवार को विधिवत कलश स्थापना के साथ देवी मैया के नवरात्रों का आगाज किया जाएगा जो पूरे 9 दिनों तक जारी रहेगा। नवरात्रि में देवी मैया की विशेष स्थिति का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। हालांकि कोरोना काल के चलते इस बार थोडा सहमे हुए लोग इसको अमलीजामा पहनाने की तैयारियां करते रहे। देवी मैया के कलश स्थापना के लिए मिट्टी के बने कलश की मांग आज भी पहले जैसे ही बरकरार रही। मैया की लहंगा चुनरी के लिए बाजारों में दुकानें सजी विभिन्न रंगों व डिजाइनओं की चुनरी और माता का लहंगा दुकानों पर बिकने के लिए उपलब्ध रहे जिससे लोगों ने खरीदारी की। भक्तों ने उपवास का पारण करने के लिए सूखी मेवा से लेकर रामदाना साबूदाना सिंघाड़ा व कूटू का आटा की भी खरीदारी की। नवरात्रि का पर्व देवी शक्ति मां दुर्गा की उपासना का उत्सव है। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी शक्ति के नौ अलग-अलग रूप की पूजा-आराधना की जाती है। एक वर्ष में पांच बार नवरात्र आते हैं, चैत्र, आषाढ़, अश्विन, पौष और माघ नवरात्र। इनमें चैत्र और अश्विन यानि शारदीय नवरात्रि को ही मुख्य माना गया है। इसके अलावा आषाढ़, पौष और माघ गुप्त नवरात्रि होती है। शारदीय नवरात्रि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनायी जाती है। शरद ऋतु में आगमन के कारण ही इसे शारदीय नवरात्रि कहा जाता है। नवरात्रि में देवी शक्ति माँ दुर्गा के भक्त उनके नौ रूपों की बड़े विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्र के समय घरों में कलश स्थापित कर दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू किया जाता है। नवरात्रि के दौरान देशभर में कई शक्ति पीठों पर मेले लगते हैं। इसके अलावा मंदिरों में जागरण और मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की झांकियां बनाई जाती हैं। शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि में ही भगवान श्रीराम ने देवी शक्ति की आराधना कर दुष्ट राक्षस रावण का वध किया था और समाज को यह संदेश दिया था कि अत्याचार पर हमेशा अच्छाई की जीत होती है। हिन्दुस्थान समाचार/अजय-hindusthansamachar.in