विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना से कारीगरों के घरों में आयेगी खुशियांः डीएम
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना से कारीगरों के घरों में आयेगी खुशियांः डीएम
उत्तर-प्रदेश

विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना से कारीगरों के घरों में आयेगी खुशियांः डीएम

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-मुद्रा योजना से भी स्वयं का कारोबार खड़ा करने को मिल रहा लोन हमीरपुर, 17 सितम्बर (हि.स.)। जिलाधिकारी ज्ञानेश्वर त्रिपाठी ने गुरुवार को यहां कहा कि योगी आदित्यनाथ की सरकार ने शहरी एवं ग्रामीण इलाकों के कारीगरों, बढ़ई, लोहार, दर्जी, टोकरी, बुनकर, नाई, सुनार, कुम्हार, हलवाई, जूते चप्पल बनाने वाले आदि स्वराजगारियों तथा पारम्परिक हस्त शिल्पियों की कलाओं के प्रोत्साहन एवं उनकी आय में वृद्धि करने के अवसर मुहैया कराने को विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना लागू की है जिससे इनके घरों में खुशहाली आयेगी। जिलाधिकारी ने बताया कि 'कोरोना काल में अन्य प्रदेशों में काम करने वाले उप्र के कारीगरों व श्रमिकों के वापस आने पर अब उन्हें बेरोजगारी की समस्या न आये, इसके लिए प्रदेश सरकार ने तैयारी कर ली है। लाखों की संख्या में वापस आये प्रदेश के श्रमिकों को काम-काज मिल सके इसें विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना बड़ी मददगार साबित हो रही है। जनपद में इस योजना के अंतर्गत कुसमरा के मनोज को राजमिस्त्री, रमेडी के प्रमोद कुमार को बढ़ई गिरी, पौथिया के लालाराम को कुम्भकारी, मुख्यालय के रहुनिया धर्मशाला निवासी मन्नालाल गुप्ता को हलवाईगिरी व कुरारा के विजयपाल को लोहारगिरी हेतु निःशुल्क टूलकिट का वितरण किया जा चुका है तथा इन सभी लाभार्थियों को 6 दिन की आवासीय व निःशुल्क प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया है। मुद्रा योजना के अंर्तगत जरूरतमंद लोगों को चिन्हित कर उन्हें स्वरोजगार हेतु बैंको के माध्यम से ऋण स्वीकृत कराया जा रहा है। जनपद में 05 लाभार्थियों को अपना रोजगार खड़ा किये जाने हेतु 01-01 लाख का ऋण स्वीकृत कराया गया है इसमें रानी लक्ष्मी बाई पार्क की लक्ष्मी, पटकाना की सजल श्रीवास्तव व कुरारा की हीराबाई को अपना-अपना ब्यूटीपार्लर संचालन हेतु 01-01 लाख का, खरौज के इमरान को बिल्डिंग कारोबार हेतु तथा कुरारा के धर्मेंद्र को होटल संचालन हेतु 01-01 लाख का ऋण स्वीकृत कराया गया है। अब ये सभी लोग इस सहायता से अपना स्वयं का कारोबार खड़ा कर सकेंगे। जिलाधिकारी ने बताया कि ’विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थी की पात्रता भी है। इसके अन्तर्गत आवेदन करने वाला व्यक्ति उप्र का मूल निवासी हो और कम से कम 18 वर्ष का होना जरूरी है। इसमें शैक्षिक अनिवार्यता नहीं है। आवेदन करने वाला व्यक्ति बीते दो वर्षों में इस तरह की किसी अन्य योजना का लाभ न लिया हो। ’प्रदेश सरकार इस योजनान्तर्गत लाभ लेने वाले कारीगरों, श्रमिकों को तहसील अथवा मुख्यालय पर लघु या मध्यम उद्यम विभाग द्वारा 6 दिन की मुफ्त ट्रेनिंग दी जाती है।’ यह ट्रेनिंग इस तरह प्रैक्टिकल रूप में दी जाती है कि लाभार्थी आसानी से सीख लेता है। ट्रेनिंग के दौरान खाने-पीने, रहने की व्यवस्था सरकार द्वारा वहन किया जाता है। लाभार्थियों को सरकार की तरफ से मजदूरी दर के समान कारीगरों को वित्तीय मदद भी दी जाती है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद लाभार्थियों को उनके द्वारा चुने गये ट्रेड के अनुसार टूल किट भी प्रदान किया जाता है।’प्रशिक्षण प्राप्त कर अपना उद्यम, कारोबार स्थापित करने वाले अभ्यर्थियों को 10 हजार रू० से लेकर 10 लाख रू० तक की बैंकों के माध्यम से ऋण दिलाते हुए आर्थिक सहायता की जाती है। योगी सरकार इस योजना के अन्तर्गत हजारों लोगों को स्वयं का कारोबार स्थापित कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है। हिन्दुस्थान समाचार/पंकज-hindusthansamachar.in