वर्षा जल संचयन से भूजल स्तर बनाये रखने को 'भुंगरु प्रणाली' का होगा ट्रायल
वर्षा जल संचयन से भूजल स्तर बनाये रखने को 'भुंगरु प्रणाली' का होगा ट्रायल
उत्तर-प्रदेश

वर्षा जल संचयन से भूजल स्तर बनाये रखने को 'भुंगरु प्रणाली' का होगा ट्रायल

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-कम पानी उपलब्धता वाली जगहों पर गन्ने की खेती होगी सम्भव लखनऊ, 30 जुलाई (हि.स.)। गन्ने की खेती में पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए वर्षा जल के जरिए भू-जल स्तर को रिचार्ज करने के तहत उप्र गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर के उपकेन्द्रों गन्ना शोध केन्द्र अमहट, सुलतानपुर तथा कटयां सादात, गाजीपुर में ट्रायल के तौर पर 'भुंगरु प्रणाली' की स्थापना कराने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किये गये हैं। प्रदेश के आयुक्त, गन्ना एवं चीनी संजय आर. भूसरेड्डी ने गुरुवार को बताया कि 'भुंगरू' एक जल संरक्षण तकनीक है। इस तकनीक में कंक्रीट का घेरा बनाकर उसके बीच एक 10 से 15 फीट की पाइप भूमि में डाल दी जाती है जिसके माध्यम से वर्षा के दिनों में वर्षा का पानी इकट्ठा होकर भूमि में रिचार्ज हो जाता है। किसान जरूरत पड़ने पर उस पानी को मोटर पम्प से बाहर निकालकर सिंचाई कर सकते हैं। ये तकनीक मानसून के दौरान होने वाले पानी के नुकसान को भी बचाती है। उन्होंने बताया कि यह पद्धति परम्परागत रूप में गुजरात के कई क्षेत्रों में प्रचलित है। यह पद्धति प्रायः उन क्षेत्रों के लिए बहुत उपयोगी है जहां वर्षा का पानी ऊसर प्रभावी क्षेत्रों में हार्डपैन बन जाने अथवा ढलान वाले क्षेत्रों में रिचार्ज नहीं हो पाने के कारण बहाव के माध्यम से नष्ट हो जाता है। श्री भूसरेड्डी ने वाटर हार्वेस्टिंग के अच्छे परिणाम प्राप्त करने के लिए उप्र गन्ना शोध परिषद को निर्देश दिए हैं कि गन्ना शोध केन्द्र अमहट, सुलतानपुर तथा कटयां सादात, गाजीपुर में ट्रायल के तौर पर 'भुंगरु प्रणाली' की स्थापना की जाये जिससे प्राप्त परिणामों के आधार पर प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी इस प्रणाली का प्रयोग कर प्रदेश के गन्ना किसानों को लाभान्वित किया जा सके। इस तकनीक के प्रयोग से वर्षा जल का भरपूर उपयोग होगा तथा गिरते भू-जल स्तर को भी रोकने में सहायता मिलेगी। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/राजेश-hindusthansamachar.in