लखनऊ विवि ने कराई ऑनलाइन राष्ट्रीय काव्य प्रतियोगिता, विभिन्न प्रांतों से 350 कवि हुए शामिल
लखनऊ विवि ने कराई ऑनलाइन राष्ट्रीय काव्य प्रतियोगिता, विभिन्न प्रांतों से 350 कवि हुए शामिल
उत्तर-प्रदेश

लखनऊ विवि ने कराई ऑनलाइन राष्ट्रीय काव्य प्रतियोगिता, विभिन्न प्रांतों से 350 कवि हुए शामिल

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-अंग्रेजी वर्ग में मुदिता शुक्ला को प्रथम, दिव्यश्री बनर्जी को द्वितीय स्थान -हिंदी वर्ग में शिवम पांडेय को प्रथम, प्रियंका द्विवेदी रहीं दूसरे स्थान पर लखनऊ, 18 अक्टूबर (हि.स.)। लखनऊ विश्वविद्यालय नवीन परिसर के लखनऊ विश्वविद्यालय सांस्कृतिक एवं खेल समिति द्वारा प्रथम राष्ट्रीय ऑनलाइन काव्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। हिंदी व अंग्रेजी दोनों ही वर्गों के लिए आयोजित इस प्रतियोगिता में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और गुजरात से लेकर असम तक के प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। प्रथम दौर में दोनों ही वर्गो के लगभग 350 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया, जिसमें से अंतिम दौर के लिए सिर्फ 10 प्रतिभागियों को चुना गया। प्रतियोगिता के अंतिम दौर में पहुंचने वाले प्रतिभागियों में आशीष प्रताप सिंह, अनंदिता मित्रा, प्रियंका द्विवेदी, दिव्यश्री बनर्जी, अफीफा खातून, मुदिता शुक्ला, शिवम पाण्डेय, अलीशा खान, सौरभ कुमार वर्मा व अभिजीत सिंह रहे, जिन्होंने हिंदी व अंग्रेजी भाषा में अपनी सुंदर कविताओं से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंग्रेजी वर्ग में मुदिता शुक्ला को प्रथम, दिव्यश्री बनर्जी को द्वितीय तथा अलीशा खान को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। वहीं हिंदी वर्ग में शिवम पांडेय को प्रथम, प्रियंका द्विवेदी को द्वितीय तथा आशीष प्रताप सिंह को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। सभी विजेताओं को नकद पुरस्कार राशि व प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया। अंतिम दौर के कार्यक्रम का शुभारंभ लखनऊ विश्वविद्यालय नवीन परिसर के विधि संकाय के अध्यक्ष प्रो. सी.पी.सिंह ने अपने वक्तव्य से की। उन्होंने कहा कि कविता एक ऐसी विधा है, जिसमें कवि अपनी कविता के माध्यम से कठिन से कठिन विषय को सरलता से व्यक्त करता है। काव्य प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में उच्च न्यायालय लखनऊ खण्ड पीठ के वकील व कवि अमित हर्ष, तारे जमीन पर पत्रिका के संस्थापक गौरव पोरवाल, कवयित्री अनन्या रॉय पराशर, दिपाली मिश्रा, आशीष उपाध्याय व मिताली सिंह मौजूद रहे। अमित हर्ष ने कहा कि देश भर के 350 प्रतिभागियों में से अंतिम 10 में स्थान बनाने वाला प्रत्येक प्रतिभागी अपने आप में विजेता है। गौरव पोरवाल ने प्रतिभागियों के हौसला बढ़ाते हुए कहा कि व्यक्ति को स्वयं नहीं पता होता कि उसमें कितनी प्रतिभा है। व्यक्ति को सिर्फ एक सही दिशा की आवश्यकता होती है, वह स्वयं ही आगे बढ़ जाता है। हिन्दुस्थान समाचार/उपेन्द्र/संजय-hindusthansamachar.in