रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही सौ से अधिक रोगों में लाभकारी है आंवला
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही सौ से अधिक रोगों में लाभकारी है आंवला
उत्तर-प्रदेश

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही सौ से अधिक रोगों में लाभकारी है आंवला

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-आयुर्वेदाचार्य ने कहा, औषधि गुणों के कारण ही आयुर्वेद में कहा गया है अमृत फल लखनऊ, 23 दिसम्बर (हि.स.)। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही सौ से अधिक रोगों में लाभकारी आंवले को आयुर्वेद में अमृतफल या धात्रीफल कहा गया है। वैदिक काल से ही इसका प्रयोग औषधि के रूप में होता आया है। बेजान बालों में जान डालने के लिए तो यह रामबाण की तरह काम करता है। इस समय बाजार में आंवले का फल खूब आ रहा है। इस कारण सालभर दुरूस्त रहने के लिए आंवले के फल का सेवन करना उपयुक्त होगा। इस संबंध में बीएचयू के पंच कर्म विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जेपी सिंह का कहना है कि शीत ऋतु में आंवले के फल का बहुत अधिक महत्व है। यह भारतीय आयुर्वेद का मूलाधार भी माना गया है। चरक संहिता में आयु बढ़ाने, बुखार कम करने, खांसी ठीक करने और कुष्ठ रोग का नाश करने वाली औषधि के लिए अमला का उल्लेख मिलता है। इसी तरह सुश्रुत संहिता में आंवला के औषधीय गुणों के बारे में बताया गया है। इसे आंवला वह औषधि है, जो शरीर के दोष को मल के द्वारा बाहर निकालने में मदद करता है। पाचन संबंधित रोगों और पीलिया के लिए आंवला का उपयोग किया जाता है। प्रचुर मात्रा में मिलता है विटामिन सी उन्होंने बताया कि आंवले के 100 ग्राम रस में 921 मि.ग्रा. और गूदे में 720 मि.ग्रा. विटामिन सी पाया जाता है। इसमें आर्द्रता 81.2, प्रोटीन 0.5,, खनिज द्रव्य 0.7, कार्बोहाइड्रेट्स 14.1, वसा 0.1, कैल्शियम 0.05, लौह 1.2 मि.ग्रा., फॉस्फोरस 0.02, प्रतिशत, निकोटिनिक एसिड 0.2 मि.ग्रा. पाए जाते हैं। इसके अलावा इसमें गैलिक एसिड, टैनिक एसिड, शर्करा (ग्लूकोज), अलब्यूमिन, काष्ठौज आदि तत्व भी पाए जाते हैं। पौरुष को बढ़ाने के साथ ही हृदय रोग में भी लाभकारी डॉ. सिंह ने बताया कि आंवला विटामिन सी का सर्वोतम प्राकृतिक स्रोत है। विटामिन−सी एक ऐसा नाजुक तत्व होता है जो गर्मी के प्रभाव से नष्ट हो जाता है, लेकिन आंवले का नष्ट नहीं होता। यह पौरूष को बढ़ाता है। आंवला दाह, पांडु, रक्तपित्त, अरूचि, त्रिदोष, दमा, खांसी, श्वांस रोग, कब्ज, क्षय, छाती के रोग, हृदय रोग, मूत्र विकार आदि अनेक रोगों को नष्ट करने की शक्ति रखता है। उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार से बताया कि आंवला सिर के केशों को काले, घने व लम्बे रखता है। हिंदू धर्म में आंवले का पेड़ व फल दोनों ही पूज्य हैं। कहा जाता है कि आंवले का फल भगवान विष्णु को पूज्य है। आंख के हर रोग में मिलता है फायदा, पाचन में भी सहायक डॉ. सिंह ने बताया कि ने बताया कि आंवले के 1-2 बूंद रस को आंखों में डालने से आंखों के दर्द से राहत मिलती है।आंवले के बीज को घिसकर आंखों में लगाने से आंखों के रोग में फायदा पहुंचता है। आंवला आंखों की ज्योति को बढ़ाता है। यह शारीरिक क्रियाशीलता को बढ़ाने के साथ ही भोजन को पचाने में भी सहायक है। भोजन में प्रतिदिन आंवले की चटनी, मुरब्बा, अचार, रस चूर्ण आदि को शामिल करना चाहिये। इससे कब्ज की शिकायत दूर होती है। यह खून में शुगर की मात्रा को नियंत्रित करता है। हडि्डयों के लिए सर्वोत्तम औषधि उन्होंने बताया कि महिलाओं की समस्याओं के लिए बेहद लाभकारी माना गया है। इसमें कैल्शियम की मात्रा अधिक होने से यह हड्डियों के लिए सर्वोत्तम औषधि है। इसके सेवन से तनाव में आराम मिलता है। नींद अच्छी आती है। उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार से बताया कि इसमें ऐंटीआक्सीडेंट के साथ ही इम्यूनोमाड्यूलेटरी के गुण भी मौजूद होते हैं। इससे रोग प्रतिरक्षा को बूस्ट करने में सहायक होता है। शरीर में फंगस आदि बीमारियों से बचाव करता है। मूत्र विकारों से भी छुटकारा दिलाता है। कैंसर को बढ़ने नहीं देता है आंवला आंवला हमारे हृदय की मांसपेशियों के लिये उत्तम होता है। यह नलिकाओं में होने वाली रूकावट को समाप्त करता है। यह कैंसर को बढ़ने से भी रोकने में सहायक है। इसके सेवन से उग्रता व उत्तेजना से शांति मिलती है। अचानक से पसीना आना, गर्मी लगना, धातु के रोग, प्रमेय, प्रदर आदि चीजों में आराम दिलाता है। इसके रस से बवासीर ठीक हो जाता है। कुष्ठ रोग में भी यह फायदेमंद है। हिन्दुस्थान समाचार/उपेन्द्र/संजय-hindusthansamachar.in