रक्षाबंधन नारी जाति की रक्षा का संकल्प व सम्मान का प्रतीक
रक्षाबंधन नारी जाति की रक्षा का संकल्प व सम्मान का प्रतीक
उत्तर-प्रदेश

रक्षाबंधन नारी जाति की रक्षा का संकल्प व सम्मान का प्रतीक

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-केन्द्रीय आर्य युवक परिषद ने की श्रावणी पर्व व रक्षाबंधन विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी गाजियाबाद, 02 अगस्त (हि.स.)। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में श्रावणी पर्व व रक्षाबंधन विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया । इस मौके पर सभी ने नारी जाति की रक्षा व राष्ट्र रक्षा का संकल्प दोहराया। वैदिक विदुषी दर्शनाचार्या विमलेश बंसल ने कहा कि श्रावणी का अर्थ होता है आर्ष ग्रंथों का सुनना सुनाना,पढ़ना पढ़ाना अतः हमें इस दिन यज्ञ, योग व स्वाध्याय का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा हमारे ऋषि मुनि पुरातन काल मे अपने आश्रमों,गुफाओं आदि से निकल कर सामान्य जनों को वेदों और शास्त्रों के ज्ञान को देने के लिए निकल आते थे। महर्षि दयानन्द के अनुयायी आर्य समाजी लोग भी इसे वेद प्रचार सप्ताह के रूप में भी मनाते है।यज्ञ,वेद व संस्कृति का प्रचार करने के लिए ये समय सर्वोत्तम माना गया है।साथ ही उन्होंने यज्ञोपवीत संस्कार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मातृए पितृ व आचार्य ऋण को स्मरण रखने का संकल्प दिलवाया। इसी क्रम में केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि स्वाध्याय न करने के कारण ही हम सच्चे साधु,सन्त, महात्माएगुरु इत्यादि की पहचान करने में असमर्थ रहते हैं। वर्तमान में तथाकथित गुरुओं के बहकावे में आकर अंधविश्वासएपाखंडए रूढ़िवाद में फंस जाते हैं। वेद ज्ञान हमे पाखंड,अंधविश्वास,रूढ़िवाद से दूर करता है और सच्चे परमात्मा से जोड़ने का कार्य करता है।श्रावणी पर्व पर ऋषियों के माध्यम से स्वाध्याय व आर्ष ग्रन्थों को श्रवण कर सकते। इस मौके पर आचार्य महेंद्र भाईए आनन्द प्रकाश आर्य यहा पुड़द्धए अमरनाथ बत्राएजगदीश मलिकए उर्मिला आर्या यगुरुग्रामद्ध,त्रिलोक शास्त्री,ओम सपराएराजश्री यादव,नरेश प्रसाद विजेन्द्र गर्ग,प्रकाश वीर शास्त्री,गीता गर्ग आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे। हिन्दुस्थान समाचार/फरमान अली-hindusthansamachar.in