मोक्षदा एकादशी पर श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में श्रद्धा की डुबकी
मोक्षदा एकादशी पर श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में श्रद्धा की डुबकी
उत्तर-प्रदेश

मोक्षदा एकादशी पर श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में श्रद्धा की डुबकी

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कासगंज, 25 दिसम्बर (हि.स.)। शूकर क्षेत्र सोरों स्थित हरिपदी गंगा घाट पर शुक्रवार को भोर के साथ ही गंगा स्नान प्रारंभ हो गया। यहां मौजूद श्रद्धालुओं ने मोक्षदा एकादशी पर गंगा में श्रद्धा की डुबकी लगाई। भगवान वराह की पूजा अर्चना कर पुण्य लाभ कमाया। इस पर्व पर प्रशासनिक एवं नगरपालिका की व्यवस्थाएं चुस्त-दुरुस्त नजर आई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े तीर्थ स्थल शूकर क्षेत्र सोरों में मार्गशीर्ष माह के एकादशी को यहां धर्म पुराणों के मुताबिक बड़ा पर्व माना जाता है। इस पर्व को मनाने के लिए दूरदराज के इलाके से लोग यहां पहुंचते हैं। गंगा घाट पर गंगा स्नान कर भगवान बड़ा का स्मरण कर उनकी पूजा-अर्चना कर पुणे लाभ कमाते हैं। तीर्थ पुरोहित गौरव दीक्षित ने जानकारी देते हुए बताया है कि शास्त्रों के मुताबिक मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान वराह ने पाताल लोक से पृथ्वी को बाहर निकाला। हिरण्याक्ष राक्षस का वध करने के बाद एकादशी के दिन व्रत रखा। हरिपदी गंगा में स्नान किया। उसके अगले दिन द्वादशी पर भगवान वराह अपने शूकर रूप का कुंड में त्याग कर साकेत लोक के लिए चले गए। भगवान वराह से पूछा गया कि कलयुग में आपके महत्व का क्या प्रमाण होगा तो भगवान वराह ने कहा कि जो भी व्यक्ति अपने पूर्वजों की अस्थियां हरिपदी में विसर्जित करेगा, मैं उन अस्थियों को 72 घंटे में विलीन कर लूंगा और यह प्रमाण वर्तमान में साक्षात है। यहां विसर्जित की गईं अस्थियां तीन दिन के अन्त में रेणुरूप धारण कर लेती हैं। इसी परंपरा के अनुरूप प्रतिवर्ष मार्गशीर्ष माह की एकादशी से पूर्व यहां विभिन्न धार्मिक आयोजन संपन्न होते हैं, लेकिन इस वर्ष कोविड-19 के चलते मेला नहीं लगाया गया है। जबकि गंगा स्नान पूजा-अर्चना जैसे विशेष कार्यक्रम जारी है। शुक्रवार को भोर के साथ ही यहां गंगा स्नान प्रारंभ हो गया। 'गंगे हर' के उद्घोष के साथ तमाम श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाकर भगवान वराह की पूजा-अर्चना की। इस दौरान प्रशासन मुस्तैदी रही। नगर पालिका परिषदों की ओर से साफ-सफाई सहित अन्य व्यवस्थाएं चुस्त-दुरुस्त देखी गई। गंगा घाट एवं वराह मंदिर की हुई साज सज्जा प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष माह आते ही श्रद्धालुओं में विभिन्न धार्मिक पर्वों को संपन्न करने को लेकर उत्सुकता प्रारंभ हो जाती है। यहां एकादशी एवं द्वादशी पर्व महत्वपूर्ण माने जाते हैं। काफी दिन पहले से तैयारियां प्रारंभ हो जाती हैं। इस वर्ष भी तैयारियों के क्रम में भगवान वरहा के मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया। इसके अलावा यहां गंगा घाट पर चारों ओर जगमग रोशनी की गई। गुरुवार की देर रात्रि यहां घाट पर सजावट की भव्यता अलौकिक रूप में देखी गई। हिन्दुस्थान समाचार/पुष्पेंद्र सोनी/राजेश-hindusthansamachar.in