मृदा मे जैविक कार्बन की मात्रा घट रही है जो चिन्ताजनक हैैःकुलपति
मृदा मे जैविक कार्बन की मात्रा घट रही है जो चिन्ताजनक हैैःकुलपति
उत्तर-प्रदेश

मृदा मे जैविक कार्बन की मात्रा घट रही है जो चिन्ताजनक हैैःकुलपति

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वेबिनार में भारत सहित मलेशिया, फिलीपीन्स, सुरीनाम, अफगानिस्तान के 1050 प्रतिभागी रहे बांदा, 6 नवम्बर (हि.स.)।कृषि विश्वविद्यालय, बांदा के कृषि महाविद्यालय के मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग द्वारा ’’मृदा स्वास्थ्य एवं फसल उत्पादकता के लिये आवश्यक बेहतर पोषक तत्व प्रबंधन’’ पर दो दिवसीय राष्टीय वेबीनार का आयोजन किया गया। वेबिनार की अध्यक्षता कर रहे कृषि विश्वविद्यालय, बांदा के कुलपति डा. यू.एस. गौतम ने कहा कि मृदा मे जैविक कार्बन की मात्रा घट रही है जो कि चिन्ताजनक हैै। इसे हरहाल मे बढाने की जरूरत है। डा. गौतम ने कहा कि इस वेबिनार से जुडे लोग निश्चित रूप से लाभन्वित होगें और उनका ज्ञान वर्धन होगा। वेबिनार के मुख्य अतिथि ग्वालियर एवं जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा. विजय सिंह तोमर ने कहा कि भारत मे मृदा स्वास्थ्य एवं पोषक तत्व प्रबंधन पर समय की मांग के अनुसार अनुसंधान करने की आवश्यकता है। डा. तोमर ने कहा कि बुन्देलखण्ड की मृदाओं मे मृदा क्षरण की समस्या को रोकना आवश्यक है एवं पोषक तत्वो की उपलब्धता बढाने पर जोर देना चाहिये। वेबिनार के मुख्य वक्ता कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय, अमेरिका के प्रो0 जे.के. लाढा ने आनाज वाली फसलों मे नत्रजन की सही मात्रा एवं सही समय मे प्रयोग करने पर जोर दिया। प्रो0 जे.के. लाढा ने कहा कि भारत मे फसलों मे नत्रजन का प्रबंधन करके फसल उत्पादन को बढाया जा सकता है। अन्तार्राष्टीय धान अनुसंधान संस्थान फिलीपीन्स की वरिंष्ठ वैज्ञानिक डा. शीतल शर्मा ने ऐसे यंत्रों एवं एप्स के विकास पर जोर दिया जिनसे खेत मे ही खडी फसलो मे अध्ययन किया जा सके। उन्होने धान फसल मे पोषक तत्वों के प्रबंधन को मृदा स्वास्थ्य से साीधे संबन्धित बताया। भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल के परियोजना समन्वयक डा. ऐ.के. शुक्ला ने कहा कि मृदा मे जिंक एवं अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होगी तो इसका साीधा असर मनुष्य के स्वास्थ्य पर पडेगा। डा. शुक्ला ने जोर देते हुये कहा कि मृदा मे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी नही होना चाहिये अगर ऐसा है तो उनका प्रबंधन अतिआवश्क है। भारतीय गन्न अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डा. एस.आर. सिंह ने मृदा के स्वास्थ्य खराब होने के कारण एवं निदान के उपाय बताये। वेबिनार मे भारत सहित मलेशिया, फिलीपीन्स, सुरीनाम, अफगानिस्तान, एवं अन्य देशो के लगभग 1050 प्रतिभागी पंजीकृत हुये। कार्यक्रम के संयोजक डा. जगन्नाथ पाठक ने वेबिनार के उद्देश्यो एवं उसके महत्व पर प्रकाश डालते हुये कहा कि वर्तमान मे मृदा का स्वास्थ्य खराब हो रहा है एवं उर्वरक उपयोग क्षमता घट रही है जिसको सही अवस्था में लाना अतिआवश्यक है। हिन्दुस्थान समाचार/अनिल/मोहित-hindusthansamachar.in