मानवीय गरिमा को परिभाषित करता है हमारा संविधान : डाॅ. अशोक कुमार अवस्थी
मानवीय गरिमा को परिभाषित करता है हमारा संविधान : डाॅ. अशोक कुमार अवस्थी
उत्तर-प्रदेश

मानवीय गरिमा को परिभाषित करता है हमारा संविधान : डाॅ. अशोक कुमार अवस्थी

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लखनऊ,16 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा ‘भारतीय संविधान का वैशिष्ट्य’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन शुक्रवार को गूगल मीट के माध्यम से किया गया। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि डा.अशोक कुमार अवस्थी ने कहा कि मानवीय गरिमा को परिभाषित करना आसान नहीं है। गांधी जी के जीवन की एक घटना मानवीय गरिमा को समझना प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का अर्थ पशुवत जीवन से नहीं है, वरन् मानवीय जीवन से है। न्यायालय ने किन्नरों को थर्ड जेंडर का दर्जा देते हुए उन्हें गरिमा पूर्ण जीवन जीने का अधिकार दिया। इसी प्रकार अस्पृश्यता को अपराध घोषित करते हुए मानवीय गरिमा की स्थापना की गयी है। सिर पर मैला ढ़ोने की परिपाटी समाप्त कर दी गयी है, जो मानवीय गरिमा के अनुरूप है और भारतीय संविधान की विशेषता है। भारतीय संविधान में नागरिकता संशोधन विधेयक द्वारा मनुष्यों को गरिमापूर्ण जीवन जीने के योग्य बनाया जा रहा है। डाॅ. राकेश कुमार मिश्र ने कहा कि स्वतंत्राता से पूर्व ही पं. मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में एक समिति बनी जिसने स्वतंत्राता के उपरान्त भारत की संवैधानिक स्थिति पर अपने विचार रखे थे। संसार का सबसे बड़ा संविधान भारतीय संविधान को माना जाता है। हमने इंग्लैण्ड, अमेरिका, कनाडा आदि की संवैधानिक स्थिति से प्रेरणा ली। हमारी संविधान सभा में बड़े-बड़े विधिवेत्ता थे जिनके विचार विमर्श से संविधान बना। भारत संसार का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है यह संविधान की सबसे बड़ी विशेषता है। एकात्मकता विधि के शासन का सिद्धान्त, स्वायत्ता, सर्वोच्च न्यायालय को संरक्षक बनाया जाना हमारे संविधान की महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के निदेशक श्रीकांत मिश्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा कोविड-19 को दृष्टिगत रखते हुए बदली हुई परिस्थिति में साहित्यिक गतिविधियों को निरंतरता प्रदान करने के उद्देश्य से हिन्दी दिवस 14 सितम्बर, 2020 को आनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसे आप सबका सहयोग और सानिध्य प्राप्त हुआ। भारतीय संविधान के वैशिष्ट्य को रेखांकित करते हुए कार्यकारी अध्यक्ष डाॅ. सदानन्दप्रसाद गुप्त के निर्देशन में यह संगोष्ठी 7 अप्रैल, 2020 को आयोजित की जानी थी, जिसमें विद्वान वक्ताओं द्वारा भारतीय संविधान की विशेषताओं के साथ-साथ हमारे नैतिक दायित्व एवं अधिकारों पर भी चर्चा की जानी थी। कोविड-19 महामारी के कारण लाकडाउन की विषम परिस्थिति में तत्समय यह संगोष्ठी आयोजित नहीं हो सकी। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अमिता दुबे ने किया। हिन्दुस्थान समाचार/उपेन्द्र/राजेश-hindusthansamachar.in