मकान से बेदखली व जमीन की प्रकृति में बदलाव पर रोक
मकान से बेदखली व जमीन की प्रकृति में बदलाव पर रोक
उत्तर-प्रदेश

मकान से बेदखली व जमीन की प्रकृति में बदलाव पर रोक

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प्रयागराज, 01 अगस्त (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर सदर तहसील में तालाब की भूमि के एक हिस्से को बैनामे में खरीदी भूमि से याची के बेदखली पर रोक लगा दी है और दोनों पक्षों को जमीन की नवैयत में किसी प्रकार के परिवर्तन करने पर प्रतिबंधित कर दिया है। कोर्ट ने एसडीएम सदर गौरव सिंह सोगरवाल की हाजिरी माफ करते हुए राज्य सरकार से तीन हफ्ते में जवाब मांगा है। कोर्ट ने विपक्षी को नोटिस जारी कर याचिका को सुनवाई के लिए 31 अगस्त को पेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति जे जे मुनीर ने वीना सिंह की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता आद्या प्रसाद तिवारी व अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने बहस की। याची का कहना है कि उसने जमींदार से तालाब भूमि के एक हिस्से का बैनामा लिया है और उस पर मकान बनाकर रह रही है। जिला प्रशासन की ध्वस्तीकरण कार्रवाई के खिलाफ सिविल न्यायालय में निषेधाज्ञा वाद दायर किया। कोर्ट ने अंतरिम राहत नहीं दी और सरकार से जवाब मांगा है। जिसके कारण एसडीएम के आदेश से याची के मकान का एक हिस्सा तोड़ दिया गया तो उसने हाईकोर्ट की शरण ली है। याची के अधिवक्ता ने कहा कि मकान तोड़ा जा रहा है, रोक लगायी जाय तो अपर महाधिवक्ता ने कहा कि ध्वस्तीकरण कार्रवाई पहले की है। इस पर कोर्ट ने एसडीएम को तलब कर लिया और जवाब मांगते हुए याची की बेदखली एवं भूमि की प्रकृति में बदलाव पर रोक लगा दी है। हिन्दुस्थान समाचार/आरएन/दीपक-hindusthansamachar.in