भारत केन्द्रित शिक्षा की ओर ले जाएगी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति : प्रो. मनोज शुक्ल
भारत केन्द्रित शिक्षा की ओर ले जाएगी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति : प्रो. मनोज शुक्ल
उत्तर-प्रदेश

भारत केन्द्रित शिक्षा की ओर ले जाएगी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति : प्रो. मनोज शुक्ल

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- मेरी शिक्षा मेरा भारत (माईनेप) प्रतियोगिता का हुआ उद्घाटन कानपुर, 12 सितम्बर (हि.स.)। भारत केंद्रित शिक्षा से ही हम भारतीय मूल्यों को केंद्र में रखकर प्रधानमंत्री के सपनों का आत्मनिर्भर भारत बना सकते हैं। मैकॉले द्वारा हमें अपनी जड़ों से दूर करने वाली शिक्षा में निकालकर नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति हमें अपनी जड़ों से जुड़ने और उन्हें मजबूत करने का अवसर देगी। यह शिक्षा नीति विश्व में सबसे व्यापक परामर्श से बनाई गई नीतियों में से एक है, जिससे सुनिश्चित है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति हमें भारत - केंद्रित शिक्षा की ओर ले जाएगी। यह बातें मेरी शिक्षा मेरा भारत प्रतियोगिता के उद्घाटन के अवसर पर एचबीटीयू के कुलपति प्रो. मनोज शुक्ल ने कही। विद्या भारती द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 से शिक्षा में आने वाले बदलावों को जन जन तक पहुँचाने के लिए 13 भाषाओं में मेरी शिक्षा मेरा भारत (माईनेप) प्रतियोगिता कराने जा रही है। इस अखिल भारतीय स्तर के कार्यक्रम 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलेगा और, प्रतिभागियों को तीन वर्गों में बाँटा गया है। प्रथम वर्ग में कक्षा 9 से 12, द्वितीय वर्ग स्नातक के छालों एवं तृतीय वर्ग आम नागरिकों के लिए है। सभी प्रतियोगिताओं में हर वर्ग एवं भाषा के लिए पुरस्कार हैं। कार्यक्रम में “मीम बनाओ, हस्तनिर्मित एवम डिजिटल पोस्टर बनाना, प्रधानमंत्री के नाम पत्र, निबंध लेखन, प्रश्नोत्तरी इत्यादि प्रतियोगिताओं में छात्रों को भाग लेने का अवसर मिलेगा। भारतीय शिक्षा समिति कानपुर प्रांत के प्रदेश निरीक्षक आत्मानंद सिंह ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में समग्र शिक्षा पर जोर देकर इसे दूर करने का प्रयास किया गया है, जिससे छात्रों को अपने व्यक्तित्व के समग्र विकास का अवसर प्राम होगा। हमारे विद्यालयों में लगातार यह देख गया है कि गुणवत्ता से अधिक संख्या पर ध्यान दिया जाता है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में गुणवत्ता पर जोर दिया जाना एवं उसके लिए जरूरी उपाय करना एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके दूरगामी लाभ समाज को मिलेंगे। खेलकूद को इस शिक्षा नीति में पढ़ाई के बराबर स्थान दिया गया है,. जिससे छात्रों के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। चन्द्रशेखर आज़ाद कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. डीआर सिंह ने वीडियो संदेश में कहा कि “ शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान वर्धन होना चाहिए, जिससे कि एक ज्ञान आधारित समाज का निर्माण हो सके। भारतीय समाज पारंपरिक रूप से ज्ञान आधारित समाज रहा है, लेकिन विदेशी शिक्षा प्रणाली के थोपे जाने से यह लुप्त हो गया था। ज्ञान आधारित समाज बनाने की जो परिकल्पना नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में की गई है वह भारत को अपना गौरव पुनः दिलाने में महत्वपूर्ण होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद कानपुर नगर के अध्यक्ष डॉ. गिरीश मिश्रा ने कहा कि “ नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने भारतीय समाज की आवाज और मांगों पर आधारित देश की शिक्षा नीति बनाई है। विद्या भारती 1952 में अपनी स्थापना से ही भारत केंद्रित शिक्षा की मांग करती रही है। पूर्व में भी शिक्षा नीतियों में प्रबुद्ध समाज की बहुत सारी मांगों को रखा गया था, लेकिन राजनीतिक कारणों से वो क्रियान्वयन तक नहीं पहुँच पाई। इस सरकार ने जिस तरह की इच्छाशक्ति राष्ट्रहित के मुद्दों पर दिखाई है उससे पूरी उम्मीद है कि भारत केंद्रित शिक्षा का हमारा सपना धरातल पर उतरेगा। प्रेस वार्ता में डा. अंगद सिंह, राममिलन सिंह आदि मौजूद रहें। हिन्दुस्थान समाचार/अजय/मोहित-hindusthansamachar.in