बुन्देलखंडः दो कृषि विज्ञान केन्द्र, अब सेंटर आफ एक्सीलेंस के रूप में होंगे विकसित
बुन्देलखंडः दो कृषि विज्ञान केन्द्र, अब सेंटर आफ एक्सीलेंस के रूप में होंगे विकसित
उत्तर-प्रदेश

बुन्देलखंडः दो कृषि विज्ञान केन्द्र, अब सेंटर आफ एक्सीलेंस के रूप में होंगे विकसित

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- हमीरपुर और बांदा के कृषि विज्ञान केन्द्र चयनित, दोनों जिलों के लिये एक करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत हमीरपुर, 23 दिसम्बर (हि.स.)। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालयों के तहत बुन्देलखंड में दो कृषि विज्ञान केन्द्रों को अब सेंटर आफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इसके लिये हमीरपुर और बांदा के कृषि विज्ञान केन्द्र भी चयनित किये गये है। हमीरपुर को दलहन एवं बांदा को आर्गेनिक खेती के लिये चुना गया है। शासन ने इन दोनों कृषि विज्ञान केन्द्रों को पचास-पचास लाख रुपये का बजट भी स्वीकृत कर दिया है। बुन्देलखंड क्षेत्र अक्सर सूखे से प्रभावित रहता है। ऐसे में शासन की यह पहल किसानों के लिये वरदान साबित होगी क्योंकि कम पानी में दलहन का उत्पादन और आर्गेनिक खेती से किसानों की तकदीर ही बदल जायेगी। उत्तर प्रदेश शासन के विशेष सचिव अनिल ढींगरा ने कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय बांदा के कुलपति को पत्र भेजकर निर्देश दिये हैं कि कृषि विज्ञान केन्द्रों को सेन्टर ऑफ एक्लीलेंस के रूप में विकसित करने के लिए निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति का पूर्ण उत्तरदायित्व विश्वविद्यालय के कुलपति, निदेशक प्रसार तथा निदेशक शोध का होगा। परियोजना के संचालन के लिए निर्धारित लक्ष्यों के सम्बन्ध में पृथक से योजनावार विवरण रखा जायेगा। परियोजना के लिए वित्तीय एवं भौतिक लक्ष्यों का निर्धारण करते हुये विवरण शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश भी कुलपति को दिये हैं। कृषि जलवायुवी क्षेत्र के दृष्टिगत कृषि विज्ञान केन्द्र बांदा में प्राकृतिक कृषि आर्गेनिक एवं डाई लैण्ड फार्मिंग के लिए 50 लाख, जबकि कृषि विज्ञान केन्द्र हमीरपुर में जलवायु के अनुकूल दलहन उत्पादन प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के लिए 50 लाख कुल 1 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गयी है। जिसके सापेक्ष 50 प्रतिशत धनराशि अर्थात् 25-25 लाख दोनों जनपदों को कुल 50 लाख की धनराशि भी आवंटित कर दी गयी है। गौरतलब है कि, केन्द्र व प्रदेश में काबिज भाजपा सरकार कृषकों की आय दोगुनी करने के लिए पहले से ही कई प्रकार की योजनाएं संचालित की हैं। इसी क्रम में शासन ने अब कृषि विज्ञान केन्द्रों को सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकासित करने की योजना बनायी है। ताकि क्षेत्रीय की जलवायु के अनुसार वहां के किसानों के लिए उन्नत किस्म के बीजों का उत्पादन स्थानीय स्तर पर किया जा सके और किसानों को कम लागत में उन्नत बीजों से अधिक उत्पादन मिल सके। हमीरपुर की जलवायु दलहन उत्पादन के अनुकूल होने के चलते कृषि विज्ञान केन्द्र में दलहन उत्पादन प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन किया जायेगा। जबकि बांदा की जलवायु प्राकृतिक कृषि आर्गेनिक एवं डाई लैण्ड फार्मिंग के लिए उपयुक्त बतायी गयी है। कृषि उत्पादकता को बढ़ाने तथा कायम रखने में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किए गए कार्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कृषि वैज्ञानिक खेती-फसलों तथा पशुओं पर अध्ययन करते हैं तथा उनकी मात्रा तथा गुणवत्ता में सुधार के लिए मार्ग तैयार करते हैं। वे कम श्रम के साथ फसलों की मात्रा और गुणवत्ता में सुधार, कीट तथा खरपतवारों पर सुरक्षित और प्रभावी तरीके से नियंत्रण और मृदा तथा जल संरक्षण में सुधार के उपायों के सुझाव देते हैं। कच्चे कृषि माल को उपभोक्ताओं के लिए आकर्षक तथा स्वास्थ्यकर खाद्य उत्पादों में परिवर्तित करने की पद्धतियों से जुड़े अनुसंधान कार्य करते हैं। कृषि वैज्ञानिक कृषि से जुड़ी समस्याओं को हल करने में जीवविज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिकी, गणित और अन्य विज्ञानों के सिद्धान्तों का प्रयोग करते हैं। कृषि वैज्ञानिक मौलिक जैविकीय अनुसंधानों तथा जैव-प्रौद्योगिकी के जरिए प्राप्त ज्ञान को कृषि की उन्नति के लिए लागू करने के लिए अक्सर जैविक वैज्ञानिकों के साथ मिलकर कार्य करते हैं। कृषि विज्ञान केन्द्रों में उत्पादन तकनीक, सिंचाई प्रबन्धन गुणवत्ता और मात्रा की दृष्टि से कृषि उत्पादन में सुधार जैसे कि सूखा झेलने वाली फसलों पर अनुसंधान एवं विकास कार्य किए जाते हैं। हमीरपुर एवं बांदा के कृषि विज्ञान केन्द्र सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित होने से क्षेत्रीय कृषकों को आय बढ़ने की उम्मीद जगी है। जिला कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डा.एसपी सोनकर ने बुधवार को शाम बताया कि कृषि विज्ञान केन्द्र के अंदर एक एकड़ जमीन में अमरूद के बाग लगाये गये है। धनिया का भी उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा वर्मीकम्पोस्ट स्थापित है। पशुपालन और बकरी पालन को भी इस केन्द्र से बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शासन की इस पहल से किसानों को बहुत लाभ मिलेगा। किसानों की आमदनी दोगुनी करने के कार्यक्रमों को भी रफ्तार मिलेगी। हिन्दुस्थान समाचार/ पंकज/ मोहित-hindusthansamachar.in