बुंदेलखंड में घर-घर हाथी की पूजा कर महिलाओं ने महालक्ष्मी व्रत का पारण किया
बुंदेलखंड में घर-घर हाथी की पूजा कर महिलाओं ने महालक्ष्मी व्रत का पारण किया
उत्तर-प्रदेश

बुंदेलखंड में घर-घर हाथी की पूजा कर महिलाओं ने महालक्ष्मी व्रत का पारण किया

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बांदा, 10 सितम्बर (हि.स.)। द्वापर युग में महारानी कुंती के द्वारा ऐरावत हाथी की पूजा महालक्ष्मी व्रत के दौरान करने की परंपरा बुंदेलखंड में आज भी विद्यमान है। गुरुवार को यहां के जलाशयों व केन नदी में महिलाओं ने परंपरागत तरीके डुबकियां लगाई और फिर घरों में पूजा अर्चना कर व्रत का पारण किया। महालक्ष्मी का पर्व पर महिलाओं ने नदी सरोवरों में स्नान के बाद मिट्टी के हाथी बनाकर उसका पूजन अर्चन किया और कथा सुनी। गुरुवार की सुबह से ही महालक्ष्मी पर्व मनाने की तैयारियां जोरशोर से शुरू हो गई थी। सुबह नदी-सरोवरों में स्नान के बाद महिलाओं ने विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए, इसके बाद पूजन कर महालक्ष्मी की कथा सुनी। सूर्य को अर्घ्य देकर धन और वैभव की कामना की। नवाब टैंक और केन नदी के घाटों समेत विभिन्न तालाबों में पूजा के लिए महिलाओं की भीड़ रही। महिलाओं 128 बार तर्पण कर पूजा किया। पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराया। मिट्टी के हाथी पर सवार गज लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की। हल्दी, चंदन, रोली आदि चढ़ाकर मन्नतें मांगी। 16 गांठ का सूत (गंडा) बनाया और लक्ष्मी का जाप करते हुए पूजन किया 16 बार तर्पण कर गांठ लगाई। कलावा व शृंगार का सामान और प्रसाद चढ़ाया। ज्योतिषाचार्य राजेश महाराज ने बताया कि महालक्ष्मी का विधि विधान से पूजन करने पर वैभव, धन संपत्ति व वाहन की मनोकामना पूरी होती है। हिन्दुस्थान समाचार/अनिल/राजेश-hindusthansamachar.in