बिना अनुमति पाल रहे थे नर-मादा मोर, वन विभाग का छापा
बिना अनुमति पाल रहे थे नर-मादा मोर, वन विभाग का छापा
उत्तर-प्रदेश

बिना अनुमति पाल रहे थे नर-मादा मोर, वन विभाग का छापा

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गोरखपुर, 23 जुलाई (हि.स.)। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने गुरुवार की रात मोहद्दीपुर स्थित एक आवास से राष्ट्रीय पक्षी मोर का एक जोड़ा रेस्क्यू किया। नर एवं मादा मोर के जोड़े को बकायदा एक पिंजरा बनाकर बंद किया गया था। फिलहाल मेडिकल परीक्षण कराने के बाद वन विभाग की टीम ने उन्हें अपनी निगरानी में कुसम्ही जंगल स्थित मिनी जू विनोद वन में रखा है। प्रभागीय वन अधिकारी गोरखपुर अविनाश कुमार को सूचना मिली कि वार्ड संख्या 52 मोहद्दीपुर निवासी आशीष यादव पुत्र राजू यादव ने अपने घर में मोर का जोड़ा पाल रखा है। इस सूचना को डीएफओ ने गंभीरता से लिया। मोर न केवल राष्ट्रीय पक्षी है बल्कि वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972 के तहत शेड्यूल-1 में संरक्षित है। कानूनन जिसके पास भी यह पक्षी होता है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे व्यक्ति को सात साल तक की सजा या 25,000 रुपये जुर्माना या फिर दोनों ही हो सकता है। लिहाजा वन विभाग की टीम ने पहले उस स्थान की रेकी किया। जब पक्का हो गया कि आवास में मोर पाला गया है। उसके बाद वन दरोगा विजय शुक्ला, वन रक्षक मुकेश साहनी, रामनिवास और निरंजन ने छापा मारा। छापा मारने गए कर्मचारियों के मुताबिक मकान में रहने वाले लोग सहयोग नहीं कर रहे थे, जब उन्हें बताया किया कि यह कानून जुर्म है। तब वे थोड़े ढीले हुए। एक बड़े से लोहे के पिजरे से नर और मादा मोर के जोड़े को पकड़ कर वन विभाग की टीम ने अपने कब्जे में लिया। उसके बाद डीएफओ कार्यालय लाए। यहां मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उन्हें कुसम्ही स्थित विनोद वन ले जाया गया। स्टेट चीफ वाइल्ड लाइफ वॉडर्न की अनुमति जरूरी हेरिटेज फाउंडेशन के नरेंद्र मिश्र बताते हैं कि मोर-मोरनी का जोड़ा गैरकानूनी ढंग से लाया गया होगा तो आरोपी परिवार मुसीबत में पड़ सकता है। मोरों की तस्करी अपराध है। चिड़ियाघरों में भी मोर पालने के लिए स्टेट चीफ वाइल्ड लाइफ वॉर्डन की अनुमति जरूरी है। चीफ वाइल्ड लाइफ वॉर्डन से आरोपियों ने मोरों को पालने की अनुमित ली थी या नहीं, इसकी भी जांच की जानी चाहिए। यह भी पता किया जाना चाहिए कि इन्हें मोर कहां से मिले थे। इस सम्बंध में डीएफओ अविनाश कुमार का कहना है कि ‘मोर के पालने की कोई अनुमति नहीं ली गई थी। इस मामले में आरोपी के खिलाफ वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972 के अंतर्गत केस दर्ज कर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। हिन्दुस्थान समाचार/आमोद/दीपक-hindusthansamachar.in