बाबा विश्वनाथ की नगरी में आदि शक्ति के पूजन की तैयारी, पहले दिन शैलपुत्री का दर्शन पूजन
बाबा विश्वनाथ की नगरी में आदि शक्ति के पूजन की तैयारी, पहले दिन शैलपुत्री का दर्शन पूजन
उत्तर-प्रदेश

बाबा विश्वनाथ की नगरी में आदि शक्ति के पूजन की तैयारी, पहले दिन शैलपुत्री का दर्शन पूजन

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वाराणसी, 16 अक्टूबर (हि.स.)। बाबा विश्वनाथ की नगरी में शुक्रवार को शारदीय नवरात्र की तैयारियां घरों और मंदिरों में पूरे दिन चलती रही। अलईपुर स्थित शैलपुत्री दरबार में बैरिकेडिंग कार्य को अन्तिम रूप दिया गया। नगर के सभी बड़े छोटे देवी मंदिरों के आसपास पूजन सामग्री की अस्थाई दुकान लगाने के लिए दुकानदार जुटे रहे। महिलाएं बाजारों में भगवती के पूजन को लेकर कलश स्थापना करने के लिए पूजन सामग्री की खरीददारी कर रही हैं। बाजार में नारियल, चुनरी, कट्टू का आटा एवं फल की दुकानों पर चहल पहल बनी हुई है। शनिवार 17 अक्टूबर को नवरात्र का पहला दिन होगा। अधिकमास के कारण लगभग 25 दिन देर से नवरात्रि का आगमन हो रहा है। सर्वार्थसिद्धि योग में पूरे 09 दिन के नवरात्र में माता रानी घोड़े पर सवार आ रही है। शुरुआत शनिवार के दिन से हो रही है। काशी सुमेरूपीठ के पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य नरेन्द्रानंद सरस्वती ने बताया कि माता रानी का घोड़े पर आना संकेत है कि भारत का पड़ोसी देशों से तनाव बढ़ सकता है। नवरात्र का आखिरी दिन रविवार को है। भगवती भैंसे पर सवार होकर जाएंगी। भगवती का भैंसे पर जाना भी अच्छा नहीं माना जाता। देश में महामारी का दौर तो चल ही रहा है। इसके बढ़ने की आशंका भी बरकरार है। इसके बावजूद दशहरे तक त्रिपुष्कर, सौभाग्य और रवियोग जैसे खास मुहूर्त भी है। उन्होंने बताया कि नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त अपराह्न एक बजे तक है। घट स्थापना मुहूर्त का समय प्रात:काल 06:27 बजे से 10:13 बजे तक है। 18 अक्टूबर को दूसरे दिन बह्मचारिणी देवी, तीसरे दिन 19 अक्टूबर भगवती चंद्रघंटा, चौथे दिन 20 अक्टूबर को दुर्गाकुंड स्थित कुष्मांडा दरबार, पांचवे दिन 21 अक्टूबर को जैतपुरा स्थित स्कंदमाता, 22 अक्टूबर छठंवे दिन कात्यायनी देवी, 23 अक्टूबर को सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी अन्नपूर्णा और नौवें दिन सिद्धिदात्री के दर्शन पूजन का विधान है। हिन्दुस्थान समाचार/श्रीधर/संजय-hindusthansamachar.in