बलिया के पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा देने में मदद करेगा जेएनसीयू : प्रो. कल्पलता
बलिया के पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा देने में मदद करेगा जेएनसीयू : प्रो. कल्पलता
उत्तर-प्रदेश

बलिया के पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा देने में मदद करेगा जेएनसीयू : प्रो. कल्पलता

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बलिया, 17 अगस्त (हि. स.)। जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान व वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट यानी ओडीओपी को लेकर पहल करेगा। महज चार साल पुराना विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ सामुदायिक जिम्मेदारियों के तहत यह कार्य करेगा। ये बातें नवागत कुलपति प्रो. कल्पलता पांडेय ने कही। वे सोमवार को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में प्रेसवार्ता को संबोधित कर रही थीं। कुलपति ने कहा कि चार साल पहले बने इस विश्वविद्यालय को शिक्षा देने के साथ-साथ रोजगार देने वाला भी बनाया जाएगा। इसके लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना व प्रदेश सरकार के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत जोड़ा जाएगा। कहा कि छह माह पहले मैंने विश्वविद्यालय की कुलपति का कार्यभार संभालने के बाद अब तक यह पाया है कि देश में सबसे पहले आजादी हासिल करने वाला यह जिला उतना विकसित नहीं हुआ, जितने का हकदार है। यहां उद्योग शून्यता की स्थिति है। जिले के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा नहीं किए गए। जबकि उद्योग के क्षेत्र में यहां अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने ओडीओपी के तहत यहां जिन कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित करने का फैसला किया है, उन्हें लेकर विश्वविद्यालय भी अपनी ओर से पहल करेगा। परिसर में यहां की टिकुली व सिन्होरा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी। प्रशिक्षण ही नहीं बल्कि उत्पादों को बेचने के लिए भी प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जाएगा। टिकुली और सिन्होरा उद्योग के साथ-साथ आर्टिफिशियल ज्वेलरी बनाने का भी प्रशिक्षण महिलाओं को दिया जाएगा। इसके अलावा भी कौशल विकास के विभिन्न कार्यक्रम विश्वविद्यालय चलाएगा। क्योंकि मेरा मानना है कि विश्वविद्यालय का काम सिर्फ शिक्षा देना ही नहीं अपितु सामुदायिक कार्यों को करना भी है। वीसी ने कहा कि खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की भी पहल की गई है। उससे जिले की प्रतिभाओं को विश्व फलक पर उड़ान भरने में मदद मिलेगी। कहा कि अभी कई आधारभूत संरचनाओं को स्थापित किया जाना बाकी है। विश्वविद्यालय में भवनों के लिए ढाई सौ करोड़ रुपए का डीपीआर तैयार है। जिसे शासन को भेजा जा रहा है। इससे मुख्य गेट और बाउंड्रीवाल का भी निर्माण होना है। कहा कि फिलहाल विवि परिसर में दस ट्रेडिशनल विषयों की पढ़ाई हो रही है। जिसके लिए 70 पोस्ट अनुमन्य है। जबकि मैं चाहती हूं कि यहां और अधिक विद्यार्थी आएं। ताकि शैक्षिक वातावरण का निर्माण हो सके। इसके लिए 12 ऐसे विषयों में पीजी कोर्स शुरू किए जा रहे हैं, जो जिले के अन्य कालेजों में नहीं हैं। वीसी का कार्यभार ग्रहण करने के छह माह में किए कार्यों के बारे में उन्होंने कहा कि पीएचडी कोर्स वर्क चालू किया गया। ई-लर्निंग विकसित हुआ है। जिसके माध्यम से सेमेस्टर की कक्षाएं समय से पूरी हुई हैं। कहा कि ऑनलाइन माध्यम से हो रही पढ़ाई की लगातार मॉनिटरिंग स्वंय करती हूं। हमें खुशी है कि ग्रामीण इलाका होने के बावजूद यहां के सभी महाविद्यालय डिजिटल तकनीक का अच्छा सदुपयोग कर रहे हैं। वीसी ने कहा कि प्रोत्साहन के साथ-साथ अनियमितताओं पर अंकुश लगाने का भी प्रयास चल रहा है। कहा कि 60 ऐसे शिक्षक चिन्हित किए गए, जिनका नाम तीन-तीन स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में चल रहा था। इसके लिए इन कालेजों को चेतावनी जारी की गई। दूसरे जिलों तक विवि का विस्तार करने के हो रहे प्रयास प्रो. कल्पलता पांडेय ने अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में कहा कि अभी बलिया प्रदेश का पहला जिला है, जिसमें स्थापित विश्वविद्यालय से 128 कालेज जुड़े हैं। आसपास के कुछ जिलों को भी विश्वविद्यालय से जोड़ने के लिए शासन से पहल की गई है। यदि कुछ और जिले जुड़ जाएंगे तो विश्वविद्यालय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेगा। जलजमाव दे रहा तकलीफ प्रो. कल्पलता पांडेय ने कहा कि यहां काफी चुनौतियां हैं। हालांकि, मुझे चुनौतियां पसन्द हैं। बोलीं, विश्वविद्यालय परिसर में जुलाई माह से ही हुए जलजमाव से काफी दुखी दिखीं। उन्होंने कहा कि इसके पास से गुजरने वाले कटहल नाले की सफाई के लिए शासन और स्थानीय जिला प्रशासन को अवगत कराया गया है। उम्मीद है शीघ्र ही इस समस्या से निजात मिलेगी। उन्होंने कहा कि हर साल पांच माह तक रहने वाली पानी की समस्या से मुख्यमंत्री को भी अवगत कराया है। अपने अंदर के अध्यापक को मरने नहीं दूंगी प्रो. कल्पलता आठवीं तक शहर के ही जीजीआईसी में पढ़ीं प्रो. कल्पलता पांडेय टीडी कालेज के प्राचार्य रहे पंडित सीताराम चतुर्वेदी की नतिनी हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय व बीएचयू से शिक्षा हासिल कर चुकी प्रो. कल्पलता पांडेय इसके पहले महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी में शिक्षा संकायाध्यक्ष रही हैं। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विश्वविद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के बाद जीजीआईसी में जाकर वहां की मिट्टी को अपने माथे पर लगाया था। क्योंकि यहीं की शिक्षा से आज जो कुछ भी हूं। कहा कि आज भले ही प्रशासनिक पद पर हूं, लेकिन अपने अंदर के अध्यापक को कभी मरने नहीं दूंगी। मेरा पहला आनंद का विषय अध्यापन ही है। यही मेरी पूंजी है। मैं हमेशा विद्यार्थियों से जुड़े रहना चाहती हूं। कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़े कालेजों के शिक्षकों से भी हमेशा यही कहती हूं कि अध्यापन में कोई कोताही न करें। सितम्बर में 7 से शुरू होंगी परीक्षाएं, 22 तक प्रवेश कुलपति प्रो. कल्पलता पाण्डेय ने कहा कि कोविड 19 को देखते हुए विश्वविद्यालय ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए प्रवेश शुल्क घटाकर 500 रुपए कर दिया है। संबद्ध कालेजों से 22 सितम्बर तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सात सितंबर से परीक्षाएं प्रारंभ होंगी। जो 30 सितंबर तक चलेंगी। कहा कि कोरोना काल से पहले तक जितनी भी परीक्षाएं हुई थीं, उनका मूल्यांकन हो चुका है। स्नातक पार्ट टू व पार्टी थ्री में तय शर्तों के अनुसार विद्यार्थियों को प्रोन्नत किया जाएगा। बलिया की विभूतियों को जड़ों से जोड़ने का होगा प्रयास कुलपति प्रो. कल्पलता पांडेय की प्रारंभिक शिक्षा जिले में ही हुई है। लिहाजा यहां की मिट्टी से काफी लगाव है। जो प्रेसवार्ता में दिखा भी। उन्होंने कहा कि मेरा सपना है कि जिले से जुड़ीं ऐसी विभूतियां, जिन्होंने देश-विदेश में इस ऐतिहासिक धरती का नाम ऊंचा किया है, उन्हें उनकी जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। नीति आयोग के चेयरमैन अमिताभ कांत व रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद यादव का नाम लेते हुए कहा कि इनके जैसे लोगों को एक प्लेटफार्म पर लाया जाएगा। ताकि नई पीढ़ी में उत्साह का संचार हो सके। इसके लिए 'बलिया की विभूतियां' नाम से फेसबुक पेज बनाया जाएगा। इन सभी लोगों को बड़े समारोह में बुलाया जाएगा। हिन्दुस्थान समाचार/पंकज/दीपक-hindusthansamachar.in