पौधों की वृद्धि-विकास में भागीदारी पर सीमैप में शुरू हुआ सम्मेलन, 14 देशों के विशेषज्ञ कर रहे प्रतिभाग
पौधों की वृद्धि-विकास में भागीदारी पर सीमैप में शुरू हुआ सम्मेलन, 14 देशों के विशेषज्ञ कर रहे प्रतिभाग
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पौधों की वृद्धि-विकास में भागीदारी पर सीमैप में शुरू हुआ सम्मेलन, 14 देशों के विशेषज्ञ कर रहे प्रतिभाग

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-ऑनलाइन प्लांट स्पेशलाइज्ड मेटाबालिज्म ऐंड मेटाबोलिक इंजीनियरिंग पर हो रहा तीन दिवसीय सम्मेलन लखनऊ, 14 अक्टूबर (हि.स.)। लखनऊ में ऑनलाइन प्लांट स्पेशलाइज्ड मेटाबॉलिज्म ऐंड मेटाबोलिक इंजीनियरिंग पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन के डॉ. शेखर सी मांडे, महानिदेशक, सीएसआईआर एवं सचिव, डीएसआईआर, भारत सरकार द्वारा किया गया। डॉ. दिनेश नागेगौड़ा, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एवं सम्मेलन के संयोजक ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में अमेरिका, जर्मनी, इजरायल, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और फ्रांस के लगभग 14 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और विभिन्न राष्ट्रीय अनुसंधान प्रयोगशालाओं और शैक्षणिक संस्थानों के 21 राष्ट्रीय वक्ता विचार-विमर्श के लिए आएंगे। पौधों से विशेष मेटाबोलाइट्स पर तीन दिन, उनके जैवसंश्लेषण और विनियमन सहित, पौधों की वृद्धि और विकास में भागीदारी, चयापचय इंजीनियरिंग या सिंथेटिक जीव विज्ञान द्वारा उनके अतिउत्पादन के लिए अलग-अलग रणनीति, और मानव स्वास्थ्य के लिए उनके उपयोग पर चर्चा होगी। सम्मेलन में भाग लेने के लिए 450 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है। सम्मेलन का उद्देश्य भाग लेने वाले प्रतिनिधियों को प्लांट स्पेशलाइज्ड मेटाबॉलिज्म और संबंधित विषयों के क्षेत्र में अभिनव अनुसंधान करने के लिए प्रोत्साहित करना है। उद्घाटन के दौरान, सीएसआईआर-सीमैप के निदेशक, डॉक्टर प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने मुख्य अतिथि और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने यह भी बताया कि इस कठिन समय में यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन युवा शोधकर्ताओं के लिए अपने वैज्ञानिक निष्कर्षों का आदान-प्रदान करने और दीर्घकालिक अनुसंधान में मदद करने के लिए प्लांट मेटॅबोलाइट्स के क्षेत्र में काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय को जोड़ने का एक प्रयास है। उन्होंने यह भी बताया कि सम्मेलन के दौरान लगभग 15 युवा शोधकर्ता अपने शोध कार्य प्रस्तुत करेंगे और साथ ही एक ई-पोस्टर सत्र भी आयोजित किया जाएगा। अपने उद्घाटन भाषण में, डॉ. शेखर सी. मांडे ने अपनी तरह के कार्यक्रम इंटरनेशनल वर्चुअल कॉन्फ्रेंस के अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय प्रतिभागियों का स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने प्रतिभागियों से मानव जाति के लिए लाभ के लिए सेकेंडरी मेटॅबोलाइट्स की भूमिका पर रिसर्च करने का आग्रह किया। उन्होंने सीएसआईआर-सीमैप के पिछले तीन दशकों में देश में मेन्थॉल तेल उत्पादन में क्रांति लाने के योगदान की सराहना की जिसने भारत को मेन्थॉल तेल का प्रमुख निर्यातक बना दिया है। उन्होंने सीएसआईआर एरोमा मिशन में सीमैप के प्रयासों की भूरी भूरी प्रशंसा की, जिसने किसान की आय बढ़ाने में मदद की है।इस आयोजन के दौरान, उन्होंने सम्मेलन की ई-पुस्तक का विमोचन भी किया। उद्घाटन व्याख्यान प्रो. नतालिया, डुडारेवा, बायोकैमिस्ट्री के मानद प्रोफेसर, पर्ड्यू विश्वविद्यालय, अमेरिका द्वारा दिया गया था, जिसमें उन्होंने वाष्पशील यौगिकों पर अपने विचार रखे । उन्होंने बताया कि पौधे वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (वीओसी) की एक अद्भुत विविधता को संश्लेषित करते हैं जो उनके पर्यावरण के साथ मेलजोल की सुविधा प्रदान करते हैं, जिनमें परागणकों और बीज फैलाने वाले कीड़ों को आकर्षित करने से लेकर खुद को रोगजनकों, परजीवियों और शाकाहारी से बचाने की क्षमता प्रदान करता है। डॉ. अजीत शसनी ने समारोह में धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया और डॉ. आभा मीणा ने कार्यक्रम का समन्वय किया। हिन्दुस्थान समाचार/उपेन्द्र/संजय-hindusthansamachar.in