पीपीई किट प्रयोग के बाद दो दिन तक रहता है संक्रमण का खतरा: डा.खरे
पीपीई किट प्रयोग के बाद दो दिन तक रहता है संक्रमण का खतरा: डा.खरे
उत्तर-प्रदेश

पीपीई किट प्रयोग के बाद दो दिन तक रहता है संक्रमण का खतरा: डा.खरे

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झांसी, 10 सितम्बर(हि.स.)। कोविड-19 के खिलाफ जंग में जुटे स्वास्थ्य कर्मियों, अस्पतालों व अन्य कार्यस्थलों के स्टाॅफ को सुरक्षित बनाने में पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट (पीपीई किट) की बड़ी भूमिका है, बशर्ते इस्तेमाल के बाद उसका सही तरीके से निस्तारण किया जाए। इस्तेमाल के बाद इधर उधर खुले में छोड़ देने से संक्रमण का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। अस्पतालों, एंबुलेंस, एयरपोर्ट और यहां तक कि श्मसान घाटों पर खुले में फेंकी गई पीपीई किट से हम खुद को बचा नहीं रहें हैं बल्कि अपने साथ ही दूसरों को भी मुश्किल में डालने का काम कर रहे हैं। जनपदीय क्वालिटी एश्योरेंस परामर्शदाता डा. मनीष खरे ने बताया कि कोविड-19 के दृष्टिगत जनपद में बायो मेडिकल वेस्ट के प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। अस्पतालों के सभी डस्टबिन में दोहरी पालीथीन लगाईं जाती हैं एवं इनको दैनिक आधार पर एक प्रतिशत हाइपोक्लोराइड घोल से विसंक्रमित किया जाता है। उपयोग किये गए पीपीई किट एवं माॅस्क को पाॅलीथीन में बंदकर केवल पीले रंग के डस्टबिन में निस्तारित किया जाता है। इस्तेमाल की गई पीपीई किट से कम से कम दो दिन तक संक्रमण का पूरा खतरा रहता है। जिन अस्पतालों में सामान्य एवं कोविड दोनों मरीज भर्ती है वहां कोविड उपचाराधीन मरीजों का कचरा सामान्य मरीजों के कचरे से अलग संग्रहीत किया जाना चाहिए। किसी भी दशा में बायो मेडिकल वेस्ट को 48 घंटे से अधिक संग्रहीत नहीं किया जाना चाहिए। पीपीई किट के इस्तेमाल और निस्तारण के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बाकायदा गाइड लाइन जारी की है। इस्तेमाल के बाद इसको मशीन के जरिये ही नष्ट किया जाना सबसे उपयुक्त तरीका है। वर्तमान में बायो मेडिकल वेस्ट को बिजौली स्थित कॉमन ट्रीटमेंट फैसिलिटी एमपीसीसी के माध्यम से निस्तारित किया जा रहा है। हिन्दुस्थान समाचार/महेश/मोहित-hindusthansamachar.in