पितृ विसर्जनः पूर्वजों की आत्मा की शांति को दिन भर चला अनुष्ठान
पितृ विसर्जनः पूर्वजों की आत्मा की शांति को दिन भर चला अनुष्ठान
उत्तर-प्रदेश

पितृ विसर्जनः पूर्वजों की आत्मा की शांति को दिन भर चला अनुष्ठान

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-पितृ पक्ष के आखिरी दिन अनुष्ठान करने से मिलता है आशीर्वाद -सामाजिक दूरी के बीच यमुना नदी में हुआ पितृ विसर्जन हमीरपुर, 17 सितम्बर (हि.स.)। पितृ पक्ष के आखिरी दिन जनपद में श्राद्ध कर्म करने का अनुष्ठान गुरुवार को दिन भर चला। पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिये यमुना नदी और सरोवरों में तर्पण करने के बाद विदाई दी गयी। अश्वनी मास का पहला पखवारा पितृ पक्ष होता है जो भाद्र पक्ष की पूर्णिमा एवं अश्विनी मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर अमावस्या को समाप्त होता है। इस पक्ष में पूर्वजों का श्राद्ध कर्म कर उन्हें संतुष्ट करने के लिये लोग अनुष्ठान करते है। ऐसी मान्यता है कि यह क्रिया कर्म ही उसकी सूक्ष्म आत्मा को शक्ति प्रदान करते है। हर आत्मा अपने परिजनों से ही अपनी जरूरत के हिसाब से भोजन, पानी और आत्म की शांति की पूर्ति की अपेक्षा रखती है। जिस तरह किसी के मरने के बाद उसका सही तरीके से अंतिम संस्कार करना जरूरी होता है उसी तरह पितृ पक्ष में आत्मा की शांति और उसे तृप्त करने के लिये विधि विधान से श्राद्ध कर्म करना भी बहुत आवश्यक होता है। यहां के ज्योतिषाचार्य पंडित दिनेश दुबे व संकल्प कुमार ने बताया कि भाद्र प्रद की पूर्णिमा एवं अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक का वक्त पितृ पक्ष होता है। इस बीच अपने पितरों को संतुष्ट करने के लिये अनुष्ठान किया जाता है। इसे ही श्राद्ध कहते है। उन्होंने बताया कि इस लोक में किया गया श्राद्ध उन्हीं मानव पितरों को संतुष्ट करता हो जो पितृ लोक की यात्रा पर होते है। ये श्राद्ध कर्म से तृप्त होकर श्राद्ध करने वालों के अन्य पूर्वजों को भी तृप्त करते है। इस तरह अपने पितरों तक श्राद्ध में दी गई वस्तु भी पहुंचती है। इससे तृप्त होकर पितर श्राद्ध करने वालों को अपना आशीर्वाद देते है। पंडित सुरेश कुमार मिश्रा ने बताया कि पितृ विसर्जन के दिन श्रद्धा करने वालों को बड़ी ही सावधानी से श्राद्ध अनुष्ठान करना चाहिये। इसके बाद कन्याओं को भोजन कराने के बाद ही उसे अन्न ग्रहण करना चाहिये। उन्होंने बताया कि आधुनिक दौर में सम्पन्न लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध कर्म नहीं करते है। इसीलिये उन्हें शांति नहीं मिल रही है। कई घरों में देखा गया है कि सब कुछ होते हुये भी घर में अशांति है। श्राद्ध अनुष्ठान से पूर्वजों की आत्मा आशीर्वाद देती है। इसीलिये पितृ पक्ष के आखिरी दिन को बड़े ही सेवा भाव से विदा करना चाहिये। पितृ पक्ष के आखिरी दिन यहां लोगों ने अनुष्ठान कर कन्याओं को भोज कराया है। हमीरपुर में श्रद्धा कर्म करने वालों ने यमुना नदी में स्नान किया और फिर अनुष्ठान किया। इधर महिलाओं ने अमावस्या पर स्थानीय कल्प वृक्ष की पूजा कर फेरे लिये। कल्पवृक्ष के पास बह रही यमुना नदी किनारे महिलाओं ने घी के दीये जलाकर पूर्वजों को नमन किया। हिन्दुस्थान समाचार/पंकज-hindusthansamachar.in