पशु पालन विभाग खुद के खर्च पर किसान के खेत से उठा लाएगा पराली
पशु पालन विभाग खुद के खर्च पर किसान के खेत से उठा लाएगा पराली
उत्तर-प्रदेश

पशु पालन विभाग खुद के खर्च पर किसान के खेत से उठा लाएगा पराली

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गोवंश आश्रय स्थल को पराली देने वाले किसान को प्रशस्ति पत्र देकर प्रशासन करेगा सम्मानित मीरजापुर, 16 अक्टूबर (हि.स.)। अब किसानों को खेतों में पराली नहीं जलाना पड़ेगा।जिलाधिकारी सुशील कुमार पटेल ने किसानों से गोवंश आश्रय स्थल के पशुओं के चारे के लिए पराली को दान करने का अनुरोध किया है। कहा कि पराली दान करने वाले किसानों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया जाएगा। ऐसे किसानों को केवल कलक्ट्रेट स्थित कंट्रोल रूम को पराली दान करने की सूचना देनी होगी। इसके बाद प्रशासन खुद पराली को किसान के खेत से गोवंश आश्रय स्थल लाने की व्यवस्था में जुट जाएगा। सूबे की सरकार खेतों में पराली जलाए जाने को लेकर जहां सख्त हो गयी है। वहीं जिला प्रशासन इस मुद्दे का आसान हल ढूढ़ लिया है। जिलाधिकारी सुशील कुमार पटेल ने किसानों से पराली को खेतों में जलाने की बजाय निराश्रित पशुओं के लिए बनाए गए गोवंश आश्रय स्थल के पशुओं के चारे के लिए दान के तौर पर देने का अनुरोध किए है। इससे जहां पराली जलाने से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण को रोकने में मदद मिलेगी। वहीं गोवंश आश्रय स्थल में मौजूद लगभग 1300 निराश्रित पशुओं के लिए मुत चारा का भी इंतजाम हो जाएगा। ऐसे पशुओं के लिए शासन से चारा पर खर्च की जाने वाली धनराशि की भी बचत हो जाएगी। शासन से प्रत्येक पशु पर 30 रुपये प्रतिदिन की दर से चारा पर खर्च किया जा रहा है। पशु पालन विभाग इन पशुओं के चारे पर प्रति दिन लगभग 39 हजार रुपये खर्च कर रहा है। वहीं एक वर्ष में केवल चारे पर 14 करोड़ 23 लाख रुपये खर्च हो जाता है। डीएम का मानना है कि मुत में मिलने वाली पराली का चारा तैयार करा लिया जाएगा तो कम से कम 50 फीसदी धनराशि की बचत आसानी से हो जाएगी। इस धनराशि का उपयोग पशु आश्रय स्थल पर अन्य कार्यों के लिए कर लिया जाएगा। वहीं पशु पालन विभाग को भी इन पशुओं के चारे की व्यवस्था के लिए कोई खास दिक्कत नहीं होगी। पराली न जलाने से पर्यावरण प्रदूषण से मिलेगी मुक्तिपराली का उपयोग निराश्रित पशुओं के लिए चारे के तौर पर उपयोग किए जाने से जहां पर्यावरण प्रदूषण से आसानी से बचा जा सकेगा। वहीं पराली जलाए जाने की निगरानी से भी प्रशासन को मुक्ति मिल जाएगी। साथ ही ऐसे पराली जलाने वाले किसान भी दण्ड से बच जाएगे। किसानों की सूचना पर पशु पालन विभाग अपने खर्च पर संबंधित किसान के खेत से पराली को पशु आश्रय स्थल उठा ले जाएगा। वहीं पर ट्रैक्टर की मदद से पराली का चारा भी तैयार करा लेगा। हिन्दुस्थान समाचार/गिरजा शंकर/राजेश-hindusthansamachar.in