पशुओं के हरे चारे बरसीम पर विदेशी प्रजाति का आधिपत्य, ज्यादा उपज बनी वजह
पशुओं के हरे चारे बरसीम पर विदेशी प्रजाति का आधिपत्य, ज्यादा उपज बनी वजह
उत्तर-प्रदेश

पशुओं के हरे चारे बरसीम पर विदेशी प्रजाति का आधिपत्य, ज्यादा उपज बनी वजह

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— ब्राजील डेन्मार्क के बीज की मांग,एक बार बुवाई पर 06 बार कटाई,देशी बीज भी दे रहे टक्कर वाराणसी,21 नवम्बर (हि.स.)। देश में पशुओं के हरे चारे बरसीम बीज के बाजार में विदेशी बीजों की अधिक मांग है। वजह है देशी कम्पनियों के बीज के मुकाबले विदेशी कम्पनियों के बीज का सस्ता होना और अधिक मात्रा में चारा का उगना है। सितम्बर से जनवरी माह के बीच में बरसीम की बुवाई होती है। एक एकड़ में 15 किग्रा और बिस्वा में आधा किलो बीज का प्रयोग होता है। देश में बरसीम की बुवाई के बाद सही समय पर सिचाई से किसान कम से कम 06 बार चारे को काटते है। बीज कारोबार से जुड़े जगतगंज स्थित किसान बीज घर के संचालक राजन राय ने शनिवार को बताया कि वाराणसी पूर्वांचल सहित पूरे प्रदेश में पशुओं के लिए हरे चारे बरसीम की सर्वाधिक मांग है। बरसीम पशुओं के चारे में पचास फीसद आवश्यकता को पूरी करती है। शेष चारे के लिए किसान धान के पुआल और गेहूं का भूसा इस्तेमाल करते है। दुधारू पशुओं के लिए चने का दाना और चूनी मिली हुई भूसी, अरहर की चूनी-भूसी, पशु आहार आदि भी इस्तेमाल करते है। लेकिन ये चारा महंगा होने के कारण बरसीम चारा उनकी पहली पसंद है। उन्होंने बताया कि पशुओं के आहार पर लगभग सर्वाधिक 70 फीसद खर्च होता है। हरा चारा बरसीम उगाकर इस व्यय को काफी कम किया जा सकता है। राजन राय ने बताया कि सर्दियों और भीषण गर्मी के दौर में हरे चारे की अधिक समस्या होती है। इसमें बरसीम किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है। बरसीम की अच्छी फसल के लिए सिंचित खेत और खेत की मिट्टी दोमट तथा अधिक जलधारण क्षमता वाली होनी चाहिए। धान की फसल कटते ही खेत की गहरी जुताई और पाटा लगवाने के बाद नमी अवस्था में बरसीम के बीज डालना चाहिए। उन्होंने बताया कि बरसीम की बुआई के लिए सितम्बर के अन्तिम सप्ताह से अक्टूबर तक समय ठीक रहता है। देर से बुआई करने पर फसल में एक या दो कटाई कम मिलती है। फसल के हर कटाई के बाद पैदावार में में भी कमी आती है। उन्होंने बताया कि क्यारियों में बरसीम की बुआई ज्यादा अच्छी होती है। उन्होंने बताया कि बरसीम के बीज में प्रीमियर सीड्स,प्रीमियर सीड्स लक्ष्य,गंगा,न्यू दुर्गा सीड्स,अनमोल,पटेल सीड्स कंपनी की बीज की अधिक मांग है। 100 से 150 रूपये किग्रा के दर से इन कम्पनियों के बीज बिक रहे है। ब्राजील,डेन्मार्क,मलेशिया आदि देशों के सीडस सस्ते और अधिक उपजाउ है। इन देशों के उन्नत बीज के मुकाबले भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान ( आईजीएफआरआई), झांसी और ललितपुर के बीज की मांग काफी कम है। उन्होंने बताया कि बरसीम बीज के क्षेत्र में देशी कम्पनियों लाभ कम होने के चलते बहुत रूचि नही लेती। कई कम्पनियां बंद भी हो गई है। देशी बीज थोड़े मंहगे भी है। राजन राय ने बताया कि कुछ देशी किस्म के बरसीम बीज वरदान, मेस्कावी, पूसा ज्वाइन्ट आदि है। इन बीजों से भी बरसीम की फसल अच्छी होती है। हिसार बरसीम की मांग बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि बरसीम की अधिक पैदावार लेने के लिए खेत में गोबर की खाद के अलावा सिंगल सुपर फास्फेट व यूरिया भी डालनी चाहिए। लगभग 60 दिन बाद बरसीम पहली कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसके बाद 40 दिनों के अंतर पर दूसरी फिर 30 दिन के अंतर पर कटाई होनी चाहिए। ऐसे ही चार से छह बार बरसीम की कटाई होती है। हिन्दुस्थान समाचार/श्रीधर/मोहित-hindusthansamachar.in