पपीता : कोरोना संक्रमण से बचाव के साथ ही कमाई का अच्छा जरिया भी है उत्पाद
पपीता : कोरोना संक्रमण से बचाव के साथ ही कमाई का अच्छा जरिया भी है उत्पाद
उत्तर-प्रदेश

पपीता : कोरोना संक्रमण से बचाव के साथ ही कमाई का अच्छा जरिया भी है उत्पाद

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-आयुर्वेदाचार्य डाक्टर एसके राय ने कहा, कैंसर जैसी बीमारियों से भी लड़ने की क्षमता रखता है पपीता -गृह विज्ञान की वैज्ञानिक डाक्टर साधना वैश ने कहा, घरेलू महिलाओं के अच्छा कमाई का जरिया है पपीता से बने उत्पाद लखनऊ, 24 जुलाई (हि.स.)। शरीर के इम्यूनिटी सिस्टम को बढ़ाकर कोरोना के संक्रमण से बचाव सहित पपीता कई रोगों से शरीर की रक्षा करता है। इसके साथ ही इस संक्रमण के काल में घर में रहकर ही इसके विभिन्न उत्पाद तैयार कर महिलाएं अच्छा पैसा कमा सकती हैं। आयुर्वेदाचार्य डाक्टर एसके राय ने बताया कि पपीते में विटामिन ए, विटामिन सी, नियासिन, मैग्नीशियम, कैरोटीन, फाइबर, फोलेट, पोटैशियम, कॉपर, कैल्शियम और कई तरह के एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं। पपीते में कुछ मात्रा में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट भी होते हैं। एक छोटे पपीते में लगभग 60 कैलोरी होती है। पपीता विटामिन सी, एंटीऑक्सिडेंट्स व फाइबर से भरपूर होने के कारण दिल की बीमारियों से बचाता है। इसके साथ ही यह वजन को नियंत्रित करने में भी काफी फायदेमंद है। श्वेत रक्त कणिकाओं के निर्माण में सहायक डाक्टर एसके राय ने बताया कि पपीते के सेवन से शरीर को कई जरूरी तत्वों की पूर्ति हो जाती है। शरीर को विटामिन सी भी भरपूर मात्रा में मिलता है, जो श्वेत रक्त कणिकाओं के निर्माण में सहायक साबित होता है। इसमें उपस्थित एंटीऑक्सिडेंट, प्रोटीन, विटामिन ए और ई हमारे प्रतिरक्षा तंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक हैं। इससे कई बीमारियां दूर रहती हैं। आंखों के लिए भी है फायदेमंद उन्होंने कहा कि पपीते में आंखों के लिए जरूरी विटामिन ए की प्रचुरता होती है। इसमें नीली रोशनी से आंखों का बचाव करने वाला कैरोटिनॉइड ल्यूटिन पाया जाता है। पपीते में मौजूद लाइकोपिन, कैरोटिनॉइड, एंटीऑक्सिडेंट, बीटा-क्रिप्टोक्साथीन और बीटा कैरोटिन आदि तत्व कैंसर से बचाव करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं गृह विज्ञान की वैज्ञानिक डाक्टर साधना वैश ने बताया कि ऐसे समय में जब बाजार, भीड़भाड़ वाली जगहों से बचना हो। इसके साथ ही घरेलू बजट की भी चिंता सता रही हो तो पपीता के उत्पाद बनाकर घरेलू महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। कई महिलाओं ने इसे शुरू भी किया है। कोरोना काल में फायदेमंद होने के कारण इसके हर उत्पाद बिकने में भी कोई परेशानी नहीं होती। नेक्टर, जैम, जैली, मुरब्बा बनाकर हो जाती अच्छी कमाई कृषि विज्ञान केन्द्र सरियांव में कार्यरत डाक्टर साधना वैश ने बताया कि नेक्टर, स्क्वैश, जैम, जैली, मुरब्बा, कैण्डी इत्यादि बनाया जा सकता है। नेक्टर बनाने के लिए पपीता का गूदा एक किलो, चीनी दो सौ ग्राम, पानी डेढ़ लीटर, साइट्रिक एसिड पांच ग्राम, पोटैशियम मेटा बाई सल्फाइट डेढ़ ग्राम की जरूरत होती है। गूदे में पानी की आधी मात्रा डालकर थोड़ा गर्म करें। उसे बारिक काटकर छान लें। इसके बाद चीनी, शेष पानी व साइटिक एसिड को एक में मिलाकर गर्म करें। इसके बाद पपीते के रस को चीनी के घोल में मिला दें। उसमें मेटा बाई सल्फाइट को थोड़े से रस में मिलाकर सारे पदार्थ को मिलाकर बोतलों में भरकर रख दें। इसी तरह स्क्वैश के बारे में डाक्टर साधना वैश ने बताया कि इसको भी बनाने की विधि नेक्टर की ही भांति है। इसमें सिर्फ चीनी की मात्रा डेढ़ किग्रा, पानी एक लीटर पोटैशियम मेटा बाई सल्फाइट ढाई ग्राम,साइट्रिक एसिड दो ग्राम हो जाता है। जैम बनाना भी है काफी आसान उन्होंने बताया कि जैम बनाने के लिए एक किलो पपीते का गुदा, 750 ग्राम चीनी, 100 मिली लीटर पानी, साइट्रिक एसिड तीन ग्राम लेकर पपीते को कद्दू कस कर लें। गूदे को थोड़ा पकाएं। इसी में चीनी व साइट्रिक एसिड मिलाकर गाढ़ेपन तक पकाएं। इसके बाद जैम तैयार है। इसी तरह सख्त पपीते को लेकर उसका मुरब्बा भी बनाया जाता है, जो काफी रूचिकर होने के साथ ही फायदेमंद भी होता है। हिन्दुस्थान समाचार/उपेन्द्र/राजेश-hindusthansamachar.in