पंकज चौधरी ने गौतम बुद्ध से जुड़े स्थलों को पर्यटन स्थल का रूप देने का मुद्दा संसद में उठाया
पंकज चौधरी ने गौतम बुद्ध से जुड़े स्थलों को पर्यटन स्थल का रूप देने का मुद्दा संसद में उठाया
उत्तर-प्रदेश

पंकज चौधरी ने गौतम बुद्ध से जुड़े स्थलों को पर्यटन स्थल का रूप देने का मुद्दा संसद में उठाया

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महराजगंज, 22 अगस्त (हि.स.)। महराजगंज के सांसद पंकज चौधरी ने जनपद में स्थित गौतमबुद्ध से जुड़े स्थलों देवदह, रामग्राम, कुवरवर्ती सहित अन्य को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग संसद में की। सांसद ने महाराजगंज में भगवान गौतम बुद्ध से जुड़े तीन महत्वपूर्ण बौद्ध स्थलों की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान बुद्ध की ननिहाल, देवदह, समाधि स्थल रामग्राम का धातु चैत्य तथा गुह्य त्याग के पश्चात राजसी वस्त्राभूषण त्यागने का स्थान कुवरवर्ती स्तूप का स्थल है। महाराजगंज में यह स्थल क्रमश बनरसिया, कन्हैया बाबा का स्थान तथा चिउटहा गाव में स्थित है। देवदह भगवान बुद्ध की ननिहाल थी। यहां एक मंगल पोखरणी थी जिसमें केवल राज परिवार के लोग ही स्नान कर सकते थे। बनरसिया में यह आज भी स्थित है। उन्होंने कहा कि यहां भगवान बुद्ध के नाना महाराज अंजन के महल के अवशेष तथा ईंट से बने दो विशाल स्तूप भी हैं जो संभवतः भगवान बुद्ध की मां महामाया तथा उनका लालन पालन करने वाली उनकी मौसी महाप्रजापति गौतमी के अस्थि अवशेष पर बनाये गए हैं। रामग्राम का स्तूप भगवान गौतम बुद्ध के अस्थि अवशेष के आठवें भाग पर बनाया गया था। यह उनकी समाधि है। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी राम ग्राम की यात्रा की थी। वह यहां ईटों से बने विशाल स्तूप व उसके आगे मानेरटी के होने की बात लिखी है। कन्हैया बाबा के स्थान पर ईटों का बना विशाल स्तूप उसके सामने लगभग दस एकड़ में मानेरटी के खंडहर तथा पुष्करणी आज भी देखी जा सकती है। यह स्तूप ह्वेनसांग द्वारा वर्णित कपिलवस्तु से इसकी दिशा व दूरी से मेल खाता है। ज्ञातव्य है कि अभी तक राम ग्राम के स्तूप की पहचान नहीं हुई। इस स्तूप के पास कुषाण कालीन तांबे के सिक्के मिले हैं। सांसद पंकज चौधरी ने कहा कि 1992 में यहां पुरातत्व विभाग की पटना इकाई द्वारा सीमित उत्खनन कराया गया था जिसमें पुरातात्विक महत्व के अनेक कुषाण कालीन अवशेष मिले थे। बौद्ध धर्म ग्रंथों में कपिलवस्तु से देवदह की दिशा व दूरी इस स्थान से मेल खाते हैं। इनमें से पहले दो स्थलों का सर्वेक्षण उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा किया जा चुका है। 2003 में इन स्थानों से होकर बौद्ध परिपथ की योजना भी बनी थी लेकिन तत्कालीन केंद्र व प्रदेश सरकार की उदासीनता के कारण से इस योजना पर अमल नही हो सका। सांसद ने सरकार से इन स्थलों का राष्ट्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा सर्वेक्षण व उत्खनन कराकर इन स्थलों को विधिवत चिन्हित कराकर पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किये जाने की योजना पर विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के पिछड़े जनपद में भगवान बुद्ध के ननिहाल देवदह उनके समाधि स्थल रामग्राम का धातु चैत्य तथा राजसी वरस्त्राभूषण त्यागने का स्थान कुवारवर्ती स्तूप जो कि क्रमशः बनरसिया ,कन्हैया बाबा स्थान व चिउटहा को राष्ट्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा शीघ्र चिन्हित कराते हुए उत्खनन करा कर विकसित किया जाए तथा बौद्ध सर्किट से इसको भी जोड़ा जाए। हिन्दुस्थान समाचार/पुनीत/दीपक-hindusthansamachar.in