नवरात्रि विशेष: सुहेलवा घने जंगलों के मध्य आस्था का केन्द्र है मां रहिया देवी का मंदिर
नवरात्रि विशेष: सुहेलवा घने जंगलों के मध्य आस्था का केन्द्र है मां रहिया देवी का मंदिर
उत्तर-प्रदेश

नवरात्रि विशेष: सुहेलवा घने जंगलों के मध्य आस्था का केन्द्र है मां रहिया देवी का मंदिर

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बलरामपुर, 16 अक्टूबर (हि.स.)। नेपाल सीमा से जुड़े सोहेलवा जंगल में स्थित रहिया देवी मंदिर कई रहस्य अपने आप में समेटे हुए है। मांं रहिया देवी का यह मंदिर श्रद्धालु के आस्था का केंद्र बना हुआ है। थारू जनजाति के लोग रहिया देवी को अपना कुलदेवी मानते हैं। जानकारों का यह कहना है कि आज से कई सदियों पहले इनका नाम बाराही देवी था। कालांतर में 'ब' अक्षर का लोप हो गया, अब केवल रहिया देवी नाम इन्हें जाना जाता है। थारू जनजाति के लोग गणधुर की अगुवाई में ही अपनी आराध्य देवी की पूजा-अर्चना करते हैं। प्रत्येक पूजा टोली के एक अगुआ होते हैं जिन्हें गणधुर कहते हैं। पूजा रात के 10 बजे से शुरू होती है। पूजन के समय लोगों के बोलने पर मनाही होती है। मंदिर बेलवा जंगल की बीचों-बीच में स्थापित है मंदिर से तकरीबन पांच किलोमीटर की दूरी पर नेपाल सीमा शुरू हो जाता है। नेपाल सीमा नजदीकी होने के चलते नेपाल के ग्रामीण भी माता के दर्शन करने पहुंचते हैं। मां बाराही देवी (रहिया देवी) मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है, इसको लेकर अलग-अलग लोकोक्तियां भी हैं। मंदिर की ऐतिहासिकता व महत्व दो पीढ़ियों से मंदिर की व्यवस्था देख रहे पुजारी शिव प्रसाद बताते हैं कि मंदिर के बारे में किसी को कुछ नहीं पता कि यह मंदिर कितना पुराना है। यहां पहुंच रहे श्रद्धालुओं तथा स्थानीय निवासियों के सहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार वर्ष 2000 में हुआ है। यहां पहुंचना अति दुर्गम है फिर भी नवरात्रि के समय काफी दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। स्थानीय थारू नान बाबू ने हिन्दुस्थान समाचार एजेंसी को बताया कि पूर्वजों से मिली जानकारी के मुताबिक यह क्षेत्र दारा शिकोह का बसाया नगर था। उसी के नाम पर दारा नदी मंदिर के बगल से बह रही है। यह मंदिर रानी सरंगा से जुड़ा हुआ है जिसके गीत लोग गांव में गाते हैं। मंदिर में रहिया देवी के साथ काल भैरव, पंचमुखी हनुमान एवं अन्नपूर्णा देवी की पूजन कर श्रद्धालु परिवार के समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्रि में यहां नौ दिन का मेला लगता है। हिन्दुस्थान समाचार/प्रभाकर/संजय-hindusthansamachar.in