नई पीढ़ी को प्राचीन शिक्षा पद्धति के महत्व को बताया जाय : कुलपति
नई पीढ़ी को प्राचीन शिक्षा पद्धति के महत्व को बताया जाय : कुलपति
उत्तर-प्रदेश

नई पीढ़ी को प्राचीन शिक्षा पद्धति के महत्व को बताया जाय : कुलपति

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- कोविड 19 ने पूरे विश्व की दशा व दिशा बदल दिया : प्रो गुप्ता प्रयागराज, 10 सितम्बर (हि.स.)। कोविड-19 ने पूरे विश्व की दशा एवं दिशा को बदल दिया है, इसमें शिक्षा का क्षेत्र भी अछूता नहीं रहा। जो कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित है और एक चुनौती के रूप में विद्यमान है। उक्त विचार मुख्य वक्ता प्रो. एस.पी गुप्ता, पूर्व निदेशक, शिक्षा विद्याशाखा, उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विवि प्रयागराज ने गुरूवार को मुक्त विवि प्रयागराज की ओर से गुरुवार को ‘नई शिक्षा नीति एवं समकालीन चुनौतियां’’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय ऑनलाइन वेबकॉन में व्यक्त किया। उन्होंने सामाजिक एवं आर्थिक संकट, पर्यावरण तथा प्रौद्योगिकी विकास की चुनौती तथा शैक्षिक चुनौतियों के बारे में सचेत किया। प्रो. गुप्ता ने कहा कि आज शिक्षक-प्रशिक्षण में भी गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण नहीं हो पा रहा है जिसके कारण शिक्षा जगत में समस्यायें बढ़ती जा रहीं हैं। इसके समाधान की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षानीति इन सभी चुनौतियों से निपटने के लिए दृढ़संकल्पित है। अध्यक्षता करते हुये कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर कहा, यह दौर चर्चा और चिंतन का है। समय के अनुरूप सभी क्षेत्रों में बदलाव होता रहता है। इसी के अनुरूप शिक्षानीति भी बदलती है। उन्होंने प्राचीन शिक्षा पद्धति की महत्ता को प्रतिपादित करते हुए कहा कि दुनिया के लोग शिक्षा प्राप्त करने भारत आते थे, परन्तु अब इसके क्षरण के कारण भारत के लोग विदेश जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपनी मेधा को पुनर्जीवन देना है। चरक सुश्रुत, गार्गी इत्यादि विद्वानों का आविर्भाव इसी धरा पर हुआ। हमें नयी पीढ़ी को इनके बारे में बताना चाहिये। प्रो. सिंह ने कहा कि समतायुक्त, विषमतामुक्त, समरसता युक्त तंत्र का विकास शिक्षानीति का मूल मंत्र है। कहा कि संस्कृत पढ़ना कठिन है, पढ़ लिये तो समझना कठिन है। समझ लिये तो समझाना कठिन है। लेकिन संस्कृत में सभी क्षेत्र विद्यमान है। जर्मनी के दीवार की तरह भाषा की दीवार भी टूट रही है। नई शिक्षा नीति किसी दल, सरकार की नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र की है। इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक प्रो. पी.के पाण्डेय, सह संयोजक डॉ. जी.के द्विवेदी, आयोजन सचिव डॉ.दिनेश सिंह, सहसचिव डॉ.यू.एन तिवारी एवं आयोजक मंडल डॉ.नीता मिश्रा, परविन्द कुमार वर्मा, राजमणि पाल इत्यादि ने प्रतिभाग किया। हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त/राजेश-hindusthansamachar.in