धार्मिक स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध लगाने की संविधान में इजाजत : हाईकोर्ट
धार्मिक स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध लगाने की संविधान में इजाजत : हाईकोर्ट
उत्तर-प्रदेश

धार्मिक स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध लगाने की संविधान में इजाजत : हाईकोर्ट

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बकरीद पर लॉकडाउन में छूट देने की मांग से कोर्ट का इन्कार प्रयागराज, 31 जुलाई (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ईद उल अजहा पर कुर्बानी के दिन शनिवार होने और उस दिन यूपी में लॉकडाउन के चलते उसमें छूट देने की मांग को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि शनिवार को लॉकडाउन में छूट की इजाजत नहीं दी जा सकती। इसे लेकर दाखिल जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट का कहना था कि कोविड 19 की वजह से लगाए गए प्रतिबंध न तो मनमाने हैं और न ही अकारण हैं। इनको लोक क्षेम और स्वास्थ्य के मद्देनजर लगाया है। संविधान में दिया गया धार्मिक स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार निर्बाध नहीं है और राज्य को अधिकार है कि वह इस पर उचित प्रतिबंध लगा सकता है। पीस पार्टी के सदस्य और सर्जन डॉ. मो.अयूब की जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति डॉ. वाईके श्रीवास्तव की पीठ ने सुनवाई की। याची का कहना था कि एक अगस्त को बकरीद है और कुर्बानी बकरीद का अहम हिस्सा है। मगर कोविड 19 के कारण राज्य सरकार ने गाइडलाइन जारी कर हर शनिवार और रविवार को लॉकडाउन का निर्णय लिया है। एक अगस्त को शनिवार है। इसलिए शनिवार को लागू गाइडलाइन में ढील दी जाय। याची का कहना था कि संविधान के अनुच्छेद 25 में धार्मिक को मानने और उसके प्रचार प्रसार की आजादी का अधिकार मौलिक अधिकार है। राज्य सरकार की गाइडलाइन से याची को संविधान के अनुच्छेद 21 और 25 में मिले मौलिक अधिकार का हनन होता है। मौलिक अधिकारों का विशेष दर्जा है। कोर्ट का कहना था कि मौलिक अधिकार निर्बाध नहीं है। यह लोक क्षेम, जन स्वास्थ्य और संविधान के तीसरे भाग में दिए गए अन्य प्रावधानों के अधीन है। लॉकडाउन का आदेश जनस्वास्थ्य के मद्देनजर दिया गया है और ऐसी कोई वजह नहीं है कि गाइडलाइन को शिथिल किया जाए। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। हिन्दुस्थान समाचार/आर.एन/दीपक-hindusthansamachar.in