धान के कटोरे में लगा झुलसा रोग, किसानों के खून पसीने की कमाई को चट कर रहे कीडे मकोड़े
धान के कटोरे में लगा झुलसा रोग, किसानों के खून पसीने की कमाई को चट कर रहे कीडे मकोड़े
उत्तर-प्रदेश

धान के कटोरे में लगा झुलसा रोग, किसानों के खून पसीने की कमाई को चट कर रहे कीडे मकोड़े

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मीरजापुर, 22 सितम्बर (हि.स.)। धान के कटोरे में धान की लहलहाती फसलों में रोग लगना शुरू हो गया है। सरकारी कृषि रक्षा केन्द्र पर कीटनाशक दवा उपलब्ध नहीं होने से किसान परेशान नजर आ रहें हैं। सितम्बर महीने में प्रकृती के रूठ जाने व जलाशयों से पानी नहीं छोड़े जाने से धान की फसलों पर कीट-पतिंगों का साम्राज्य कायम हो गया। जबकि इन दिनों धान के पौधों में बाली निकलने का मुख्य समय माना जाता है। ऐसे में धान के कटोरे में लहलहाती फसलों मे झुलसा व गांधी रोग के साथ-साथ कीडे मकोड़े लगने से किसानों की खून-पसीने की कमाई बर्बाद होती नजर आ रही है। कोढ में खाज यह है कि कृषि रक्षा इकाई पर धान की रोपाई के बाद किसानों को जिंक उपलब्ध नही कराया गया। अब आलम यह है कि जब कीटनाशक दवा की आवश्यकता है तो उसके लिए भी कृषि विभाग कीटनाशक दवा उपलब्ध नहीं होने की बात कह कर हाथ खडा कर दिया है। इससे चलते परेशान किसान बाजार में खुले दुकानों से कीटनाशक खरीद कर खेतों में छिडकाव करने को विवश हैं और ठगी का शिकार हो रहें है। क्षेत्र के दर्जनों गांव में धान की फसलों में लगे रोग पर किसान बाजार से दवा खरीद कर धान की फसल पर छिड़काव किए हैं। इसके बावजूद दवा रोग पर बेअसर साबित हो रही है। एक पखवाड़े से बरसात नहीं होने से किसान अवर्षण के दौर से गुजर रहा है। किसानों ने जिला प्रशासन से टीम गठित कर रोग के निदान की मांग की है। धान के कटोरे में तेजी से फैल रहे रोग की रोकथाम के लिए इलाके के किसान परेशान हैं। धान की लहलहाती फसल के डंठल में सड़न किट लग जाने से धान के पौधे गल कर गिर रहे हैं। जिसके चलते धान की खेती बर्बाद हो रही है। किसान दवा की छिड़काव तो कर रहे हैं लेकिन सड़न रोग पर दवा बेअसर साबित हो रही है। ज्ञात हो कि धान की फसल में रोग लगने से पहले धान की एक दो पत्ती सफेद होती है। इसके बाद सड़न पैदा होती है। देखते ही देखते यह रोग पूरे खेत में फैल जा रहा है। अगर यही हाल रहा तो धान की पैदावार पर असर के साथ-साथ किसानों को लागत मूल्य भी निकालना मुश्किल हो जाएगा। किसानों का कहना है कि हम खेतों में उर्वरक, दवा-पानी का प्रयोग समय से किए हैं। बावजूद इसके किसी तत्व की कमी से धान मे रोग लग रहा है। कृषि विभाग द्वारा मृदा परीक्षण के नाम पर खेतों की मिट्टी तीन साल पहले लिया गया था लेकिन रिपोर्ट आज तक नहीं आई। इसके चलते किसानों को पता नहीं है कि मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है। इस सम्बन्ध में कृषि रक्षा इकाई जमालपुर पर तैनात प्रभारी प्रवीण पाण्डेय का कहना है कि मौसम मे अचानक परिवर्तन के चलते फसलों मे रोग लगना शुरू हुआ है। बरसात होने के बाद इसमें रूकावट आ जाएंगी। किसान मैलाथियान दवा के घोल का छिड़काव करें। हिन्दुस्थान समाचार/गिरजा शंकर/दीपक-hindusthansamachar.in