देश भर के वकीलों का डाटा लेने के औचित्य पर उठे सवाल
देश भर के वकीलों का डाटा लेने के औचित्य पर उठे सवाल
उत्तर-प्रदेश

देश भर के वकीलों का डाटा लेने के औचित्य पर उठे सवाल

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प्रयागराज, 17 सितम्बर (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता अमर नाथ त्रिपाठी ने बार काउन्सिल आफ इंडिया, उप्र बार काउन्सिल व हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से वकीलों की स्वायत्तता, स्वतंत्रता एवं अधिवक्ता हितों के लिए एकजुट होकर सुप्रीम कोर्ट कम्प्यूटर कमेटी के निर्णय का विरोध करने की मांग की है। त्रिपाठी ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 145 में सुप्रीम कोर्ट व एडवोकेट एक्ट की धारा 34 में हाईकोर्ट को कोर्ट संचालन प्रक्रिया रूल्स बनाने का अधिकार दिया है। मजबूत व स्वतंत्र बार के लिए एडवोकेट एक्ट 1961 में लागू किया गया है। जिसके तहत अधिवक्ताओं के अधिकार, कल्याण व सुरक्षा आदि के लिए बार काउन्सिल का गठन किया गया है। त्रिपाठी ने कहा कि एडवोकेट एक्ट अधिवक्ताओं के मजबूत बार के लिए बडे संघर्ष के बाद लाया गया है। वकीलों के पंजीकरण व अनुशासन आदि की जिम्मेदारी बार काउन्सिल को दी गयी है। कोर्ट को सीधे हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। त्रिपाठी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कंप्यूटर कमेटी ने बार काउन्सिल आफ इंडिया से देश के सभी वकीलों का डाटा मांगा है। कमेटी का कहना है कि वह आन लाइन बहस व दाखिले के प्रशिक्षण की योजना ला रही है। बार काउन्सिल आफ इंडिया ने सभी प्रदेशों की बार काउन्सिल से वकीलों का ई-मेल सहित डाटा 30 सितम्बर तक पेश करने का निर्देश दिया है। जिसके कारण सभी बार एसोसिएशनो ने अपने सदस्यों को डाटा जमा करने का निर्देश दिया है। त्रिपाठी का मानना है कि यह बार काउन्सिल आफ इंडिया की स्वायत्तता में हस्तक्षेप है। उन्होंने आश्चर्य प्रकट किया कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन सहित किसी बार संगठन या बार काउन्सिल ने इसके औचित्य पर सवाल नहीं उठाये। अगर प्रशिक्षण देना है तो यह कार्य बार काउन्सिल का है। और इसके लिए लाखो वकीलों का एक स्थान पर डाटा जमा करने का क्या औचित्य है। हिन्दुस्थान समाचार/आर.एन/राजेश-hindusthansamachar.in