दीपावली को लेकर कुम्हारों ने संजोये उम्मीद के दीये
दीपावली को लेकर कुम्हारों ने संजोये उम्मीद के दीये
उत्तर-प्रदेश

दीपावली को लेकर कुम्हारों ने संजोये उम्मीद के दीये

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-कोरोना संक्रमण काल में मिट्टी के दीये और मूर्तियां बनाने में जुटे हमीरपुर, 07 नवम्बर (हि.स.)। कोरोना संक्रमण काल में भी यहां दीपावली त्योहार के दीये और श्रीगणेश लक्ष्मी की मूर्तियां बनाने की धूम मची हुई है। कुम्हार बिरादरी के लोगों ने लाखों की संख्या में मिट्टी के दीये बनाकर बाजार में बेचने की तैयारी शुरू कर दी है। इस त्योहार में पचास से अस्सी हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी मिलने का सपना भी ये लोग संजोये हैं। हमीरपुर शहर के रहुनियां धर्मशाला और गौरादेवी मंदिर कालपी चौराहा के निकट पिछले कई दिनों से कुम्हार बिरादरी के लोग मिट्टी के दीये और खिलौने बनाने में जुटे हैं। वहीं मिट्टी के गणेश लक्ष्मी और कुबेर की मूर्तियों को रंग रोशन करने में ये परिवार समेत जुटे हैं। कुम्हारी कला को पिछले पचास सालों से आगे बढ़ाते हुये छेदीलाल प्रजापति ने बताया कि अभी तक 90 हजार मिट्टी के दीये बनाये जा चुके हैं। वहीं मिट्टी के गणेश, लक्ष्मी और कुबेर की मूर्तियों को रंगने का काम तेजी से चल रहा है। मिट्टी के दीये बनाने में भी हजारों रुपये की लागत आयी है। दिन रात की मेहनत भी इसे बनाने में लगी है। यदि सौ फीसदी माल बाजार में बिक गया तो मिट्टी के दीये से ही पचास हजार रुपये की आमदनी अतिरिक्त होगी। इसी तरह से गणेश लक्ष्मी और कुबेर की मूर्तियों को अलावा बच्चों के खिलौने भी काफी मात्रा में तैयार कराये जा रहे हैं।, जिनसे भी चालीस से पचास हजार रुपये मिलेंगे। सरकार ने भी कुम्हारी कला को नहीं चिह्नित की जमीन छेदीलाल प्रजापति, रूपेश, विमलेश, जितेन्द्र कुमार, रज्जू कुमार, मुकेश, कमलेश व राजेन्द्र ने शनिवार को बताया कि कई पुश्तों से यह कुम्हारी कला चल रही है। लेकिन, अभी तक सरकार ने भी मिट्टी के लिये कोई भी स्थान चिह्नित नहीं किया है। मजबूरी में एक हजार रुपये प्रति ट्राली के हिसाब से मिट्टी खेतों से मिलती है। मिट्टी के दाम दोगुने होने से अस्सी रुपये प्रति मिट्टी के दीये बेचना मजबूरी है। कीमत बढ़ने के कारण ज्यादा मात्रा में लोग दीये नहीं लेते हैं। रंगों के दाम भी दोगुने हो गये हैं। बता दें कि कुम्हारी कला के दम पर छेदीलाल ने अपनी चार बेटी की शादी भी की है। आधुनिकता के दौर में मिट्टी के दीयों की घटी मांग छेदीलाल व सुनील प्रजापति ने बताया कि बाजार में रंग बिरंगी बिजली के झालरों की मांग बढ़ने के कारण अब हर साल मिट्टी के दीयों की मांग घटती जा रही है। पिछले बार भी दीपावली पर उम्मीद के मुताबिक आमदनी नहीं मिली थी। काफी मात्रा में माल बच गया था। भारत और चीन में तनाव के कारण अब देश में स्वदेशी वस्तुओं और सामानों की मांग को देखते हुये ही इस बार मिट्टी के सभी तरह के आइटम अधिक मात्रा में तैयार कराये गये हैं। यदि तैयार माल बिक जाता है तो इस त्योहार में ही एक लाख रुपये तक की आमदनी हो सकती है। कई लोगों को योजना का नहीं मिला लाभ कुम्हारी कला के पुराने कारीगर छेदीलाल प्रजापति ने बताया कि योगी सरकार ने कुम्हारी कला योजना योजना शुरू की थी लेकिन अभी तक इस योजना का लाभ नहीं मिला है। इलेक्ट्रिक चाक के लिये योजना में तमाम लोगों के साथ आवेदन करने के बाद भी सभी लोग योजना से वंचित है। सुनील प्रजापति ने बताया कि पिछले माह माटी कला योजना के तहत बीस लोगों को इलेक्ट्रिक चाक बांटी गयी है मगर हमीरपुर में किसी को भी इस योजना का लाभ नहीं मिल सका। यहां हाथ से चाक चलाकर मिट्टी के खिलौने व अन्य सामान बनाना मजबूरी है। कुम्हारी कला में 25 को मिला प्रशिक्षण, नहीं मिली चाक जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबन्धक कृष्ण पाल वर्मा ने बताया कि कुम्हारी कला योजना के तहत इस साल 25 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। लेकिन, शासन से स्टूल किट न मिलने के कारण अभी तक इन्हें स्टूल किट (चाक) नहीं वितरित करायी जा सकी। उन्होंने बताया कि पिछले साल 250 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया था जिसमें सभी को स्टूल किटें बांटी जा चुकी है। इधर कुम्हारी कला से जुड़े छेदीलाल, सुनील व राजेन्द्र सहित तमाम लोगों ने बताया कि अभी तक शहर के लोगों को कुम्हारी कला और माटी कला योजना के तहत चाक व अन्य किटें नहीं मिली है। जिले के सुमेरपुर व कुरारा क्षेत्र में ऐसे लोगों को चाक व उपकरण दिये गये हैं, जो इस कला से दूर है। हिन्दुस्थान समाचार/पंकज/संजय-hindusthansamachar.in