थ्री-डी चादर के उत्पादन में चीन को चुनौती देंगे पिलखुवा के व्यापारी
थ्री-डी चादर के उत्पादन में चीन को चुनौती देंगे पिलखुवा के व्यापारी
उत्तर-प्रदेश

थ्री-डी चादर के उत्पादन में चीन को चुनौती देंगे पिलखुवा के व्यापारी

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हापुड़, 31 जुलाई (हि.स.)। थ्री-डी चादर का उत्पादन अब पिलखुवा में होना शुरू हो गया है। टेक्सटाइल सिटी में थ्री-डी चादर तैयार करने वाला कारखाना स्थापित कर उत्पादन शुरू कर दिया गया है। थ्री-डी चादर तैयार करने वाला उत्तर प्रदेश का यह पहला कारखाना है। इससे पहले हरियाणा राज्य के पानीपत में थ्री-डी चादरों का उत्पादन किया जा रहा था। पिलखुवा निर्मित थ्री-डी चादर चीन की चादर से बेहतर गुणवत्ता और सस्ते दाम में मिलेंगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने के प्रयास को मूर्त रूप देने के लिए पिलखुवा में थ्री-डी चादर का उत्पादन शुरू कर दिया गया है। पहले पानीपत और अब पिलखुवा में थ्री-डी चादरों का उत्पादन होने से चीन के इस कारोबार को भारी झटका लगेगा। थ्री-डी चादर के व्यापार में अब तक चीन की बादशाहत थी। वहां से आने वाली सस्ती एवं डिजाइनदार चादरों ने भारत के बाजारों पर पूरी तरह से कब्जा कर रखा था। भारतीय बाजार पर उसकी इस पकड़ को कम करने के लिए अब पिलखुवा के उद्यमियों ने कमर कस ली है। अब यहां भी थ्री-डी चादरों का उत्पादन शुरू कर दिया गया है। पिलखुवा बिस्तर पर बिछाने वाली चादरों एवं तिरपाल का उत्पादन करने में विश्व विख्यात रहा है। क्षेत्र में चादर का उत्पादन करने वाले लगभग डेढ़ हजार कारखाने संचालित हैं। दशकों से पिलखुवा में निर्मित चादरों का विभिन्न देशों को निर्यात किया जाता रहा है। बेहतर डिजाइन, प्रिंटिग और उत्तम गुणवत्ता वाले कपड़े के कारण यहां निर्मित चादरों की मांग अधिक रहती है। हालांकि पिलखुवा के व्यापारी विदेशी ग्राहकों के सीधे संपर्क में नहीं हैं। एजेंटों के माध्यम से ही देश और विदेश में चादरों की बिक्री की जाती है। चीन में निर्मित थ्री-डी चादरें सस्ती होने के कारण बाजार में उनकी मांग काफी बढ़ र्गइं थीं। चीन के थ्री-डी चादरों के व्यापार को टक्कर देने के लिए सबसे पहले हरियाणा राज्य के पानीपत में इस तरह की चादरों का उत्पादन शुरू किया गया था। अब पिलखुवा के उद्योगपति अशोक सिंहल ने भी थ्री-डी चादर का उत्पादन करना शुरू कर दिया है। हैंडलूम नगरी के नाम से विख्यात पिलखुवा में थ्री-डी चादर का कारखाना टेक्सटाइल सिटी में स्थापित किया गया है। कारखाने के स्वामी अशोक सिंहल ने बताया कि उत्तर प्रदेश में थ्री-डी चादर तैयार करने वाला यह पहला कारखाना है। यह कारखाना लगभग आठ-नौ माह पहले स्थापित किया गया था, लेकिन लॉकडाउन के कारण उत्पादन शुरू नहीं हो सका था। अनलॉक होने के बाद उत्पादन शुरू किया गया है। जल्द ही पिलखुवा निर्मित थ्री-डी चादरें बाजार में मिलने लगेंगी। उन्होंने बताया कि चीन में निर्मित डबल बेड की चादर बाजार में 125 रुपये की मिलती है, जबकि उससे बेहतर गुणवत्ता और नए डिजाइन वाली स्वदेशी थ्री-डी चादर 95 से 100 रुपये में मिलेगी। -क्या कहते हैं कारोबारी पिलखुवा टेक्सटाइल सेंटर व्यापारी एसोसिएशन के संरक्षक विकास शर्मा ने बताया कि पिलखुवा में बिस्तर पर बिछाने वाली चादर का बड़े स्तर पर उत्पादन होता है। सरकारी सुविधाएं नहीं मिलने के बावजूद उद्यमी अपने कारखाने संचालित किए हुए हैं। सरकारी मदद मिल जाए तो पिलखुवा में हस्तकरघा उद्योग अधिक तरक्की कर सकता है। पिलखुवा वस्त्र व्यापारी संघ के प्रधान हरिओम सिंघल का कहना है कि काफी समय से पिलखुवा में एक्सपोर्ट हाउस बनाए जाने की मांग की जा रही है। सरकार ने आज तक उद्यमियों की इस मांग की ओर ध्यान नहीं दिया गया है। एक्सपोर्ट हाउस स्थापित होने के बाद बेडशीट कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। पिलखुवा वस्त्र व्यापारी संघ के कोषाध्यक्ष संदीप गोयल का कहना है कि पिलखुवा थ्री-डी चादर के उत्पादन में चीन को अवश्य मात देगा। इसके लिए नगर में थ्रीडी चादर का उत्पादन करने वाले और कारखाने स्थापित होंगे। वर्तमान में एक कारखाना लग चुका है। कुछ अन्य उद्यमी भी इस तरह के कारखाने स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। हिन्दुस्थान समाचार/विनम्र व्रत त्यागी-hindusthansamachar.in