त्रेतायुगीन मंदिर की उजियारी देवी भक्तों के जीवन में लाती उजियारा
त्रेतायुगीन मंदिर की उजियारी देवी भक्तों के जीवन में लाती उजियारा
उत्तर-प्रदेश

त्रेतायुगीन मंदिर की उजियारी देवी भक्तों के जीवन में लाती उजियारा

news

कानपुर, 18 अक्टूबर (हि. स.)। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक नगर कहे जाने वाले कानपुर नगर सेंट्रल स्टेशन से पश्चिम दिशा में लगभग 10-12 किमी दूर मैनावती मार्ग पर बाबा जागेश्वर महादेव के पश्चिम में उजियारी पुरवा में स्थित है। यहां माँ महा शक्ति जगदम्बा उजियारी देवी का त्रेतायुगीन मन्दिर है, जिनके दर्शन मात्र से व्यक्ति का सोया भाग्य जाग जाता है औऱ जीवन मे उजियारा आ जाता है । नवरात्रि के दिनों में यहां भी भक्तों की भीड उमडती है। इस बार कोरोना संकट के चलते यहां पर भी कोविड प्रोटोकाल का पालन करवाने के लिए वालिन्टियर्स की नियुक्ति की गयी है। भूमि तल से 70 फ़ीट ऊंचे मिट्टी के टीले पर स्थापित है माँ का दरबार, लेकिन आने वालेे भक्तों को ये ऊंचाई जरा भी कष्ट नही देती। यहां के बारे में मान्यता है कि मां इस क्षेत्र की रक्षक है तभी तो आसपास के क्षेत्रवासी कई पीढ़ियों से इन्हें अपनी कुल देवी रूप में पूजते है और घर मे होने वाला कोई पहला मंगल कार्यक्रम हो या कोई संस्कार पहले उजियारी देवी को नारियल की भेंट चढ़ाई जाती है । उसके बाद ही कोई दूसरा काम होता है मां का अष्टभुजा कार मंदिर के तीन दरवाजे हैं। मुख्य द्वार पूर्व में, एक उत्तर में तथा एक दक्षिण में है। अष्टभुजाकार अरघे नुमा आसन में देवी जी विराजमान है। दो लोहे के गेट एवं 1 चैनल का है। गर्भग्रह में अनेक घंटे लटके हुए हैं, इसके आगे बरामदा है।बरामदे के बाद मैदान में बरगद, पीपल,नीम इत्यादि के पेड़ हैं। मन्दिर परिसर में स्थापित कुअें में अभी भी मीठा पानी ही आता है जिसे भक्त प्रसाद के रूप में ग्रहण करने में संकोच नही करते। माना जाता है कि कभी यह स्थान गंगा जी का तट भी रहा है। मन्दिर में सभी शुभ कामों में लोग देवी जी के दर्शन करते हैं। हिन्दुस्थान समाचार/अजय/मोहित-hindusthansamachar.in