तीन माह दुराचार का केस दर्ज न करने पर एसएसपी व थाना प्रभारी तलब
तीन माह दुराचार का केस दर्ज न करने पर एसएसपी व थाना प्रभारी तलब
उत्तर-प्रदेश

तीन माह दुराचार का केस दर्ज न करने पर एसएसपी व थाना प्रभारी तलब

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प्रयागराज, 16 अक्टूबर (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि फूलपुर की दुराचार पीड़ित की फरियाद तीन महीने तक न सुनना पुलिस की आपराधिक न्याय व्यवस्था के प्रति घोर लापरवाही है। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दर्ज एफ आई आर एवं मेडिको लीगल जांच से अभियोजन प्रभावित होगा। कोर्ट ने लापरवाह पुलिस की जवाबदेही तय करने के लिए एसएसपी प्रयागराज व थाना प्रभारी फूलपुर को 20 अक्टूबर को तलब किया है। कोर्ट ने कहा है कि गंभीर अपराधों पर कार्यवाही के मामले में उम्मीद के विपरीत पुलिस विफल हो रही है। दुराचार मामले में तीन माह बाद एफआईआर दर्ज करना जांच की खानापूर्ति है। जवाबदेही तय होनी चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति शशिकान्त गुप्ता तथा न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने रेप पीड़िता की याचिका पर दिया है । मालूम हो कि पीडिता याची फूलपुर थाने पर 11 जुलाई 20 को शिकायत लेकर गयी। पुलिस ने भगा दिया। 22 जुलाई को एसएसपी प्रयागराज से शिकायत की। कोई कार्रवाई नहीं हुई। 30 जुलाई तक रेप की एफआईआर दर्ज नहीं हुई तो उसने हाईकोर्ट की शरण ली। याचिका की सुनवाई 12 अक्टूबर को हुई। कोर्ट ने सरकारी अधिवक्ता से जानकारी लेने को कहा। 14 अक्टूबर को कोर्ट को बताया गया कि एसएसपी ने 23 जुलाई को पीड़िता की अर्जी फूलपुर थाना भेज दी थी। 13 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज की गई है। पीड़िता का बयान व मेडिको लीगल जांच की गयी है। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की एफआईआर दर्ज करने में तीन माह लगाये। देरी का कारण नहीं बताया। गंभीर अपराध की एफआईआर दर्ज तब की गयी है, जब कोर्ट ने जानकारी देने के लिए कहा। यह उचित नहीं है। हिन्दुस्थान समाचार/आर.एन/संजय-hindusthansamachar.in